डिजिटल अभिलेखागार के रूप में देश व दुनिया में अपनी पहचान बना चुके बीकानेर में अब देश का पहला अभिलेख म्यूजियम बनेगा।
विमल छंगाणी/बीकानेर। डिजिटल अभिलेखागार के रूप में देश व दुनिया में अपनी पहचान बना चुके बीकानेर में अब देश का पहला अभिलेख म्यूजियम बनेगा। इसकी तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए गुडग़ांव की एक कम्पनी ने डीपीआर बनाकर आमेर विकास प्राधिकरण को सौंप दी है।
म्यूजियम पर करीब 10 करोड़ 80 लाख रुपए खर्च होंगे। यह एक साल में बनकर तैयार हो जाएगा। म्यूजियम की खास बात यह रहेगी कि इसमें 17वीं और 18वीं शताब्दी के मूल अभिलेखों सहित विभिन्न गैलेरी के माध्यम से दुर्लभ अभिलेखों को देखा जा सकेगा।
म्यूजियम से देश व दुनिया में राजस्थान की पहचान बनेगी
बीकानेर में बनने वाले इस अभिलेख म्यूजियम से देश व दुनिया में राजस्थान की पहचान बनेगी। साथ ही बीकानेर और देश-विदेश के शोधार्थियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
यह होगा म्यूजियम में
अभिलेख म्यूजियम में मुगल बादशाहों की ओर से राजपूत राजाओं को लिखे गए 300 से अधिक हस्तलिखित शाही फरमान, 22 फीट लम्बी पुरन्दर की संधि, शिवाजी के औरंगजेब के दरबार को छोड़कर जाना, लगभग एक हजार ताम्र पत्र, ऐतिहासिक बहियां, वकील रिपोर्ट्स ( मुगल दरबार में राजपूत राजाआें के प्रतिनिधि की प्रतिदिन की दरबार की कार्रवाई), राजपूत राजाओं के आपसी पत्र व्यवहार, राजपूताना की रियासतों के विभिन्न ऐतिहासिक अभिलेख शृंखला के प्रकार, राजपूताना, भूतपूर्व रियासतों व भारत के दुर्लभ नक्शों का चित्रण, रियासतकालीन पट्टे, स्याह हुजूर, महकमा खास आदि दुर्लभ मूल दस्तावेज अलग-अलग गैलेरी में प्रदर्शित किए जाएंगे।
राज्य अभिलेखागार बीकानेर में देश का पहला अभिलेख म्यूजियम बनेगा। दुर्लभ एवं एेतिहासिक अभिलेख म्यूजियम मेंं प्रदर्शित किए जाएंगे। शोधार्थियों को लाभ होगा। देशी-विदेशी पर्यटक व जनसाधारण इन दुर्लभ एवं एेतिहासिक अभिलेखों को म्यूजियम में देख सकेंगे।
डॉ. महेन्द्र खडगावत, निदेशक, राजस्थान राज्य अभिलेखागार निदेशालय बीकानेर