स्केनिया बस में अत्याधुनिक सुविधाओं का दावा किया जा हरा हैै, लेकिन बस में सफर करने वाले यात्रियों की मानें तो यह दावा खोखला साबित हो रहा है।
यात्रियों को मोबाइल पर अपना ही इन्टरनेट डाटा खर्च करना पड़ता है। बीकानेर से जयपुर तक का सफर करने के लिए यात्रियों को 720 रुपए खर्च करने पड़ते हैं। इसमें आरामदायक सीटें, एसी, मधुर संगीत सहित कई तरह की अत्याधुनिक सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। इसके बावजूद बस में वाई-फाई सुविधा काम नहीं कर रही है।
अवगत कराया
यह मामला मुख्यालय स्तर का है, अधिकारियों को इससे अवगत करावा दिया है। बस में वाई-फाई नहीं चलने की शिकायतें सामने आई हैं।
रवि सोनी, आगार प्रबंधक
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रोडवेज डिलक्स डिपो के सूत्रों की मानें तो इस बस में वाई-फाई की सुविधा लेने के लिए गूगल के जरिए साइरस नाम का एप डाउन लोड करना पड़ता है। इसके बाद ही यह सुविधा सक्रिय होगी। ऐसे में आमयात्री इससे अनभिज्ञ हैं। बस में रोडवेज की तरफ से उनको कोई बताने वाला भी नहीं है कि वाई-फाई सुविधा किस कारण नहीं मिल रही है।
अब मेडिकल टीचर होने लगे लामबंद
बीकानेर. राजस्थान मेडिकल टीचर एसोसिएशन की बैठक मंगलवार को मेडिकल कॉलेज सभागार में हुई। इसमें मेडिकल टीचरों ने अपनी मांगों पर मंथन किया। चिकित्सकों ने मांग-पत्र सरकार को भेजने तथा मांगें नहीं मानने पर आंदोलन की आगमी रणनीति पर चर्चा करने का निर्णय किया।
एसोसिएशन अध्यक्ष डॉ. अभिषेक बिन्नाणी एवं सचिव डॉ. गुंजन सोनी ने कहा कि मेडिकल टीचर्स की वर्षों से लंबित मांगों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। सीनियर डेमोंस्टेटर की पदोन्नति के संबंध में समझौता के बावजूद निर्णय नहीं हो पाया है।
ये हैं मांगें
डॉ. सोनी ने कहा कि एकेडमिक एलाउंस को बढ़ाने, टीबी एवं हाई रिस्क वाले विभागों में एलाउंस बढ़वाने, एग्जाम में ड्यूटी देने वाले मेडिकल टीचर्स को 15 दिन का अतिरिक्त अवकाश स्वीकृत करने सहित कई मांगों को पत्र सरकार को भेजने का निर्णय किया गया है। सरकार ने मांगों पर उचित निर्णय नहीं लिया तो आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। बैठक में डॉ. प्रेमप्रकाश, डॉ. रजनीश शर्मा, डॉ. मानक गुजरानी, डॉ. राजेन्द्र सौगत आदि शामिल थे।