
लूणाराम वर्मा
महाजन. उपखण्ड क्षेत्र में केन्द्र सरकार के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट भारतमाला सड़क के निर्माण कार्य में सामान की आपूर्ति करने वाले भारी वाहनों ने गांवों की लिंक सड़कों की दशा बिगाड़ कर रख दी है। क्षेत्र के जागरूक लोगों द्वारा यह मामला उठाने व सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगने पर सामने आया है कि करीब 34 लाख का नुकसान हो चुका है। इसकी भरपाई के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग अब पत्राचार कर रहा है लेकिन इन टूटी सड$कों की सुध न तो सार्वजनिक निर्माण विभाग ले रहा है एवं ना ही भारतमाला परियोजना के तहत सड़क निर्माण करने वाली कम्पनी।
हालांकि भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बन रही सड़क का निर्माण कार्य अब अंतिम चरण में है। क्षेत्र के युवा एडवोकेट दयानन्द सारस्वत ने बताया कि भारतमाला परियोजना के जैतपुर, शेरपुरा, कपूरीसर, सहजरासर आदि में प्लाण्टों तक निर्माण सामग्री लाने वाले भारी वाहनों से लिंक सड़कों को क्षतिग्रस्त करने की शिकायत 3 जून 2021 को सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों से की थी। इस शिकायत पर सार्वजनिक निर्माण विभाग बीकानेर के अधिशासी अभियंता ने इन सम्पर्क सड$कों की मरम्मत के लिए भारतमाला परियोजना के हनुमानगढ़ स्थित निदेशक को पत्र लिखा था। उसी पत्र पर लूणकरनसर कार्यालय से रिपोर्ट मांगी गई है।
सार्वजनिक निर्माण विभाग के लूणकरनसर सहायक अभियंता रामकुमार वर्मा ने जो गत वर्ष 8 जुलाई को जो रिपोर्ट भेजी थी उसके अनुसार क्षेत्र में जो सड़क क्षतिग्रस्त हुई है उनकी लागत करीब 34 लाख रुपए है। रिपोर्ट के मुताबिक महाजन से सूंई के बीच 25 किमी सड़क क्षतिग्रस्त हुई है जिसकी मरम्मत लागत 11 लाख 50 हजार रुपए है। इसी प्रकार नाथवाणा से 1 एलकेडी के बीच 10 किमी सड़क भारी वाहनों से टूट चुकी है। इसकी मरम्मत लागत 5 लाख रुपये है। लूणकरनसर से राजपुरा हुड्डान के बीच 13 किमी सड़क क्षतिग्रस्त हुई है एवं मरम्मत लागत 6 लाख 50 हजार रुपए मानी गई है। लूणकरनसर से ढाणी भोपालाराम के बीच 10 किमी सड़क टूट गई है एवं लागत करीब 5 लाख रुपये है। इसी प्रकार कालू से सहजरासर के बीच 15 किमी सड़क भारतमाला परियोजना के भारी वाहनों से क्षतिग्रस्त मानी गई है एवं मरम्मत लागत 6 लाख रुपये बताई गई है।
उड़ते हैं धूल के गुबार
शेरपुरा, सूंई, बखुसर, ढाणी छिल्लां सहित सहजरासर आदि के बीच से 24 घण्टे भारतमाला सड़क निर्माण के लिए बने प्लाण्टों पर सामग्री लेकर जाने वाले भारी वाहन गुजरते है। जिससे सड$कें बदहाल हो चुकी है और धूल के गुब्बार उडऩे से गांवों में लोग सांस की बीमारी से ग्रसित हो रहे है।
आठ माह बाद भी नतीजा नहीं
सार्वजनिक विभाग के लूणकरनसर कार्यालय ने गत वर्ष जुलाई माह में नुकसान की रिपोर्ट बनाकर भेज दी थी। लेकिन मजे की बात यह है कि आठ माह बाद भी यह रिपोर्ट फाइलों में धूल फांक रही है। टूटी ङ्क्षलक सड$कों की मरम्मत व नवीनीकरण के लिए भारतमाला परियोजना अथवा कम्पनी ने एक पैसा भी आज तक नहीं दिया है। सारस्वत ने बताया कि ङ्क्षलक सड$कों का लाभ ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को मिलना चाहिए। जबकि भारतमाला के ठेकेदारों ने इनका उपयोग कर क्षतिग्रस्त कर डाला है। अब क्षतिग्रस्त हो चुकी ङ्क्षलक सड$कों की मरम्मत करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। ग्रामीणों ने बताया कि इन सड$कों का नवीनीकरण हो एवं भारी वाहनों को रोका जा। तब ही राहत मिल सकेगी।