Rajasthan Schools : राजस्थान में कम नामांकन वाले करीब सात हजार प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों पर ताले का संकट एक बार टल गया है। जानें इनके भाग्य पर फैसला कब होगा।
Rajasthan Schools : प्रदेश में कम नामांकन वाले करीब सात हजार प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों पर ताले का संकट एक बार टल गया है। अब इनके भविष्य पर फैसला बाद में किया जाएगा। नया शिक्षा सत्र 1 अप्रेल से शुरू हो रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि इन स्कूलों में सत्र शुरू कराया जाएगा।
असल में 25 से कम नामांकन स्कूलों की सूची बनाकर इन्हें निकटवर्ती स्कूल में मर्ज करने की शिक्षा विभाग ने तैयारी कर रखी है। इस पर फैसले के लिए 23 मार्च को जयपुर में बैठक प्रस्तावित थी। इस बैठक में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को कम नामांकन वाले स्कूलों की सूची प्रस्तुत करनी थी।
शिक्षा निदेशक ने रविवार को इस बैठक को स्थगित करने की सूचना जारी कर दी है। हालांकि ऐसा करने के कारणों की जानकारी नहीं दी गई है। माना जा रहा है कि आइएएस अधिकारियाें की तबादला सूची में स्कूल शिक्षा विभाग के शासन सचिव कृष्ण कुणाल का तबादला हो गया। इसके चलते बैठक स्थगित की गई है।
प्रदेश में कम नामांकन वाले करीब सात हजार स्कूल हैं। इनमें पच्चीस के कम नामांकन है। इसमें प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक दोनों तरह के स्कूल शामिल है। बीकानेर जिले में ऐसे 280 प्राथमिक स्कूल है।
वहीं आगामी 25 मार्च को प्रदेश के सरकारी स्कूलों के आंगन में सिर्फ शिक्षक और विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि अभिभावक भी 'सम्मानित अतिथि' के रूप में नजर आएंगे। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट की ओर से जारी आदेशों के अनुसार इस दिन स्कूलों में न केवल विद्यार्थियों की प्रगति पर चर्चा होगी, बल्कि प्रवेशोत्सव का शंखनाद करते हुए आगामी कक्षा में अस्थायी प्रवेश भी दिए जाएंगे।
कक्षा 1, 6 और 9 में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को उसी दिन अस्थायी प्रवेश दे दिया जाएगा। आंगनबाड़ी के 5-6 वर्ष के बच्चों को कक्षा 1 में जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलेगा। अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा कि नया शैक्षणिक सत्र 1 अप्रेल 2026 से शुरू हो रहा है, ताकि पहले दिन से ही शत-प्रतिशत उपस्थिति रहे। स्कूलों में होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड साझा किए जाएंगे। साथ ही बेहतर परिणाम वाले स्कूल विद्यालय सम्मान पत्र भी प्रदर्शित करेंगे। विद्यार्थियों से 50 प्रतिशत पुरानी किताबें वापस जमा करवाई जाएंगी, ताकि जरूरतमंद बच्चों को समय पर पुस्तकें मिल सकें।