
बीकानेर. आचार संहिता लागू हुए बीस दिन से अधिक समय बीत गया है। प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी चुनावी ड्यूटी में व्यस्त हैं। जिले के करीब नौ हजार कर्मचारियों और अधिकारियों को चुनाव कार्य के लिए जिम्मेदारियां सौंपी गई है। चुनावी ड्यूटी और आचार संहिता से आम लोगों के कार्य सरकारी कार्यालयों में प्रभावित हो रहे है। वहीं आम आदमी को आचार संहिता की आड़ लेकर कर्मचारी-अधिकारी टरका भी रहे हैं। शहर में दीपावली की सजावट भी नहीं हो पाई है। कोटगेट और परकोटा की दीवार पर हर साल होने वाली सजावट इस बार नहीं की गई है। जयपुर से इसकी स्वीकृति आने का इंतजार है।
राजस्थान पत्रिका टीम ने सोमवार को आम जनता से जुड़े सरकारी महकमों में जाकर हालात देखे तो अधिकांश जगह काम-काज ठप मिला। खाली मिली सीटों के कार्मिकों के बारे में पूछने पर चुनाव कार्य में गए होने का जवाब मिला, वहीं कार्यालयों में परेशान और निराश मिले आम लोगों से बात की तो उन्होंने काम नहीं होने की पीड़ा बताई। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी चुनावी ड्यूटी और आचार सहिता के चलते रोजमर्रा के कार्य बाधित नहीं होने की बात कह रहे हैं, लेकिन कार्मिकों के लिए काम नहीं करने का बहाना आचार संहिता ज्यादा बनी हुई है। नगर निगम, शिक्षा विभाग, शिक्षा विभाग, नगर विकास न्यास, जिला प्रशासन, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, उप निवेशन सहित अन्य कार्यालय खाली-खाली से दिखाई दे रहे हैं।
नगर विकास न्यास
नीलामी पर रोक
नगर विकास न्यास की योजना क्षेत्र की कॉलोनियों और क्षेत्रों में राजस्व प्राप्ति को लेकर की जा रही जमीनों की नीलामी प्रक्रिया पर आचार संहिता ने ब्रेक लगा दिए है। अक्टूबर तक के जारी नीलामी कलण्डर पर रोक लगा दी गई है।
अटके गरीबों के आशियाने
आवास योजना के तहत गरीबों और जरुरतमंद लोगों को फ्लैट आंवटन करने की लॉटरी प्रक्रिया के दौरान ही आचार संहिता लगने से आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। ईडब्लयूएस के फ्लैटों के आंवटन की लॉटरी निकली, लेकिन सूची चस्पा होने के बाद आगे की कार्यवाही बंद है। जबकि एलआइजीएच की लॉटरी भी निकल नहीं पाई।
पट्टे दे रहे, भूमि की सुपुर्दगी
अस्सी के दशक में मुरलीधर व्यास कॉलोनी में भूखण्ड आंवटित होने के बाद भी भूखण्ड प्राप्त करने से वंचित रहे आवेदकों को अन्य स्थानों पर भूखण्ड देने के लिए करीब छह माह पहले पुन: लॉटरी निकालकर भूखण्ड हरोलाई और मोहता सराय क्षेत्र में आंवटित किए गए। आचार संहिता के चलते आवंटी को पट्टे और भूमि की सुपुर्दगी नहीं मिल रही।
रुक गए विकास कार्य
न्यास की ओर से विभिन्न क्षेत्रों में निर्माण और विकास कार्यों को
लेकर करोडों रुपए की निविदाएं जारी की गई थी। कार्यादेश जारी होने से पहले ही आचार संहिता लगने से ये कार्य अटक गए है। वहीं कुछ स्थानों पर टेण्डर प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी काम चालू नहीं हो पाए।
जो चल रहे थे उनकी भी गति धीमी पड़ गई है।
नगर निगम
भामाशाह कार्ड
आचार संहिता के कारण जरुरतमंद परिवारों को भामाशाह कार्ड वितरण का काम ठप पड़ा है। करीब साढे़ चार हजार भामाशाह कार्ड वितरण नहीं हुए है। निर्वाचन विभाग ने फिलहाल वितरण कार्य को रोक दिया है।
निर्माण स्वीकृति नहीं
नगर निगम में भवन निर्माण स्वीकृति आचार संहिता में अटक कर रह गई है। निर्माण स्वीकृति के लिए लोग निगम कार्यालय के चक्कर लगा रहे है। आचार संहिता लगने के बाद से भवन निर्माण की अनुमति नहीं दी गई है।
नहीं लग रही लाइटें, सीवरेज कार्य ठप
आचार संहिता से निगम नई लाइटें नहीं लगवा रहा है। जब भी किसी मोहल्ले से नागरिक या पार्षद पुरानी लाइटें बदलवाने अथवा नई लगवाने की मांग लेकर निगम पहुंचता है तो कार्मिक आचार संहिता का कहकर टाल देते है। सीवरेज चैम्बर रिपेयर, लाइन रिपेयर कार्य भी अटके पडे़ है।
आचार संहिता में अटकी सजावट
नगर निगम की ओर से दीपावली पर शहर के परकोटे की दीवार, पांचों दरवाजों की रोशनी से सजावट, निगम कार्यालय, गंगाशहर कार्यालय और सर्किल की सजावट भी टेण्डर नहीं हो से अटक गई है। दीपावली की सजावट की स्वीकृति के लिए फाइल कलक्टर कार्यालय से डीएलबी भेजी हुई है। वहां से स्वीकृति अभी नहीं मिली है। इस वजह से सजावट नहीं हो पाई है।
शिक्षा निदेशालय
प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के कार्मिकों की ड्यूटी चुनाव में लगाने से कार्य प्रभावित हो रहे है। प्रदेशभर से शिक्षक और सेवानिवृत शिक्षक के साथ नए भर्ती शिक्षक अपने कार्यों के लिए निदेशालय आते है लेकिन अधिकांश को निराश होकर ही लौटना पड़ता है। राज्यस्तर के कार्यालयों के कर्मचारियों की ड्यूटी होने से प्रदेश में शिक्षण व्यवस्था चरमरा गई है।
नौ हजार कार्मिक-अधिकारियों की ड्यूटी
विधानसभा चुनाव देखते हुए जिले के करीब नौ हजार कर्मचारी, अधिकारियों की चुनाव में ड्यूटी लगी है। इन कार्मिक-अधिकारियों का प्रथम प्रशिक्षण २-३ नवम्बर को पूर्ण हो जाएगा। प्रशिक्षण का दौर नवम्बर में भी चलेगा। जिले में आचार संहिता उल्लंघन के कई मामले प्रकाश में आए थे, जिनकी जांच कर निस्तारित किए गए। अधिकतर मामले जनप्रतिनिधियों से जुड़े हुए थे। आचार संहिता और चुनाव ड्यूटी के चलते सरकारी विभागों में होने वाले रोजमर्रा कार्य प्रभावित नहीं हो, इस बात का विशेष ध्यान रखते हुए चुनावी ड्यूटियां लगाई है। आचार संहिता की आड़ में रोजमर्रा के कार्यों से सरकारी मुलाजिम नहीं बच सकते।
एएच गौरी, अतिरिक्त जिला कलक्टर (प्रशासन) बीकानेर