बीकानेर

चक प्लान लागू करने के आदेश, चार साल बाद भी नतीजा शून्य

2014 में मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू हुए रामबाग माइनर के चक प्लान के कार्य को आज तक लागू नहीं किया जा सका है।
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Updated: 24 Apr 2018, 1:15 PM IST
Rambagh minor case
रामबाग माइनर का मामला

महाजन. प्रशासनिक अधिकारियों की ढिलाई के चलते वर्ष २०१४ में मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू हुए रामबाग माइनर के चक प्लान के कार्य को आज तक लागू नहीं किया जा सका है। औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद भी कुछ किसानों के दबाव में मामला अधर में लटक रहा है। गौरतलब है कि माइनर के चक एक, दो व तीन की किलेबंदी का कार्य गत दस-बारह वर्ष से लम्बित था।

सिंचित विभाग की ओर से चक प्लान के मुताबिक राजस्व रिकॉर्ड संधारित करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर तहसील कार्यालय में करीब १६ वर्ष पूर्व जमा करवाने के बाद भी अधिकारियों की ढिलाई के चलते यह कार्य लटका था। जबकि तीनों चकों में चक प्लान के मुताबिक खाळों, पुलियों, नक्कों आदि का निर्माण किया हुआ है एवं काश्तकार उसी हिसाब से कृषि कार्य कर रहे है।

इस मामले को लेकर घेसूरा के काश्तकारों ने २०१४ में २४ जून को मुख्यमंत्री के लूणकरनसर में जनसुनवाई कार्यक्रम में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। प्रार्थना पत्र पर तलब तत्कालीन तहसीलदार को ३० दिवस के भीतर चक प्लान लागू करने के सख्त निर्देश दिए थे लेकिन लम्बे समय तक कार्य प्रारम्भ नहीं किया गया।

किसानों ने बताया कि चार साल से चक प्लान लागू नहीं होने के कारण अटके राजमार्ग से रामबाग तक सड़क निर्माण के कार्य को तो प्रशासन ने पूर्ण करवा दिया लेकिन अब चक प्लान लागू करने में कोताही बरती जा रही है। चक प्लान के अभाव में बड़े किसान छोटे किसानों का हक मार रहे है। राजस्व अधिकारी स्टाफ कम होने व कार्य अधिक होने का बहाना बनाकर मामले को लटका रहे है।

समय तो लगेगा
रामबाग माइनर को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जा रही है। एकमात्र पटवारी होने से उसे कभी कहीं तो कभी लगाना पड़ता है। चक प्लान लागू होने में समय तो लगेगा।
जयदीप मित्तल, नायब तहसीलदार महाजन।

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