बीकानेर

राजस्थान में जल्द सरकारी नौकरी छोड़ने वालों के लिए अ​ब सख्त नियम, अवकाश मामले में महिला कर्मचारियों को बड़ी राहत

सरकारी नौकरी में नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण लेकर जल्द सेवा छोड़ने वाले कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने नियम सख्त कर दिए है। वहीं महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव और सरोगेसी के मामले में राहत दी गई है।
2 min read
• •
Updated: 4 Sep 2026, 10:49 AM IST
Bhajanlal Sharma
भजनलाल शर्मा (Photo-Patrika)

बीकानेर। सरकारी नौकरी में नियुक्ति के बाद प्रशिक्षण लेकर जल्द सेवा छोड़ने वाले कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने नियम सख्त कर दिए है। वहीं महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव और सरोगेसी के मामले में राहत दी गई है। नए नियम के तहत राजपत्रित पद पर नियुक्ति के बाद स्वतंत्र प्रभार संभालने से पहले निर्धारित प्रशिक्षण लेने वाले कर्मचारी को प्रशिक्षण शुरू होने से पहले बॉन्ड देना होगा। प्रशिक्षण के दौरान या प्रशिक्षण पूरा होने के दो वर्ष के भीतर इस्तीफा देने अथवा दूसरी नौकरी स्वीकार करने पर सरकार प्रशिक्षण पर किए गए खर्च और अन्य प्रशिक्षण संबंधी खर्च की वसूली कर सकेगी। हालांकि, वसूली में कर्मचारी को दिया गया वेतन तथा नियमानुसार मिले यात्रा एवं दैनिक भत्ते शामिल नहीं होंगे।

यदि कर्मचारी को केंद्र सरकार, किसी अन्य राज्य सरकार, केंद्र या राजस्थान सरकार के पूर्ण अथवा आंशिक स्वामित्व वाले सार्वजनिक उपक्रम, क्वासी-गवर्नमेंट संगठन, आरबीआई या ग्रामीण बैंक में नौकरी मिलती है और इसके लिए राजस्थान सरकार की सेवा छोड़नी पड़ती है, तो बॉन्ड की शर्त उसी रूप में लागू नहीं होगी। ऐसे कर्मचारी से नए नियोक्ता के यहां निर्धारित अवधि तक सेवा करने के लिए नया बॉन्ड लिया जाएगा। अवधि और शर्ते संबंधित प्रशासनिक विभाग तय करेगा।

6 माह तक की ट्रेनिंग पर 1 साल की सेवा जरूरी

तीन महीने से अधिक अवधि के प्रशिक्षण पर भेजे गए और नियम 7 (8) (बी) के तहत ड्यूटी पर माने गए कर्मचारियों पर भी बॉन्ड की शर्त लागू होगी। 3 महीने से अधिक और 6 महीने तक के प्रशिक्षण के बाद कम से कम एक वर्ष राज्य सेवा करनी होगी। 6 महीने से अधिक के प्रशिक्षण के बाद कम से कम दो वर्ष राज्य सेवा करनी होगी। निर्धारित अवधि पूरी किए बिना सेवा छोड़ने या दूसरी नौकरी स्वीकार करने पर प्रशिक्षण पर हुए खर्च की वसूली का प्रावधान रहेगा।

पहले से आवेदन किया है, तो भी मिल सकेगी अनुमति

यदि किसी ने राजस्थान सरकार की सेवा में आने से पहले ही केंद्र सरकार, अन्य राज्य सरकार, सरकारी उपक्रम या संबंधित संस्थाओं में आवेदन कर रखा था और उस समय आवेदन उचित माध्यम से भेजना संभव नहीं था, तो उसे भी इस प्रावधान का लाभ मिल सकता है। इसके लिए कर्मचारी को राजस्थान सरकार की सेवा में शामिल होने के एक महीने के भीतर सरकार को इसकी सूचना देनी होगी। चाइल्ड केयर लीव के नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब सामान्य स्थिति में यह अवकाश एक कैलेंडर वर्ष में तीन से अधिक स्पेल में नहीं दिया जाएगा।

पहली बार अलग मातृत्व अवकाश

यदि सरोगेट मां और कमीशनिंग मां में से कोई एक या दोनों सरकारी कर्मचारी हैं, तो सरोगेट मां को 180 दिन तक मातृत्व अवकाश, कमीशनिंग मां को 90 दिन तक मातृत्व अवकाश मिल सकेगा। सरोगेट मां के लिए विवाहित महिला सरकारी कर्मचारी होना, उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच होना और इम्प्लांटेशन के समय उसका स्वयं का बच्चा होना जैसी शर्तें रखी गई हैं। वहीं कमीशनिंग मां की उम्र 23 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

Updated on:
4 Sep 2026, 10:49 AM IST
Published on: