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66 साल का रिकॉर्ड टूटा! बीकानेर में 5वीं बार महिला के हाथ होगी जिला परिषद की कमान; जानें कौन हैं रेस में आगे

बीकानेर जिला परिषद में इतिहास दोहराने जा रहा है। 66 वर्षों के सफर में 5वीं बार जिले की कमान महिला शक्ति के हाथों में होगी। अब तक कांता खतूरिया, सुनीता तार्ड और सुशीला सींवर ही इस पद पर रही हैं।
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bikaner zila parishad elections

सुनिता तर्ड और सुशीला सींवर (पत्रिका फोटो)

Bikaner Zila Parishad Election: बीकानेर जिला परिषद के इतिहास में एक बार फिर महिला जिला प्रमुख बनने जा रही है। इस बार जिला प्रमुख का पद अनारक्षित महिला के लिए आरक्षित होने से किसी भी वर्ग की महिला को यह जिम्मेदारी संभालने का अवसर मिलेगा।

जिला परिषद के करीब 66 साल के इतिहास में अब तक तीन महिला जनप्रतिनिधि चार बार जिला प्रमुख रह चुकी हैं। अब नए चुनाव के बाद पांचवीं बार इस पद की कमान महिला के हाथों में होगी। इस तरह जिला परिषद में महिला नेतृत्व की एक नई कड़ी जुड़ेगी।

बीकानेर जिला परिषद के इतिहास में कांता खतूरिया ऐसी महिला जनप्रतिनिधि हैं, जिन्हें दो बार जिला प्रमुख बनने का अवसर मिला। वे पहली बार 1980 से 1985 तक इस पद पर रहीं। इसके बाद उन्होंने 1985 से 1987 तक फिर जिला प्रमुख की जिम्मेदारी संभाली। कांता खतूरिया के अलावा अब तक किसी अन्य महिला जनप्रतिनिधि ने दो बार यह पद नहीं संभाला है।

सुनीता तर्ड और सुशीला सींवर भी रहीं जिला प्रमुख

जिला परिषद में सुनीता तर्ड और सुशीला सींवर भी जिला प्रमुख की जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। सुनीता तर्ड वर्ष 2000 से 2005 तक इस पद पर रहीं, जबकि सुशीला सींवर ने वर्ष 2015 से 2020 तक जिला प्रमुख के रूप में कार्य किया। इस तरह तीन महिला जनप्रतिनिधियों ने चार कार्यकालों में जिला परिषद का नेतृत्व किया है। इन सभी ने जिला परिषद में जिला प्रमुख के दायित्व का कुशलतापूर्वक निर्वहन किया।

अब तक महिला जिला प्रमुखों के कार्यकाल

जिला प्रमुखकार्यकाल
कांता खतूरिया1980-1985
कांता खतूरिया1985-1987
सुनीता तर्ड2000-2005
सुशीला सींवर2015-2020

निगाहें नए नेतृत्व पर

जिला परिषद चुनाव के बाद चुनी जाने वाली नई महिला जिला प्रमुख के सामने ग्रामीण विकास योजनाओं, बुनियादी सुविधाओं और जिला परिषद के कामकाज को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी होगी।

जिला परिषद चुनाव: तीन वार्ड, तीन ही सियासी चेहरे, जिला प्रमुख की कुर्सी पर नजर

बीकानेर जिला परिषद के 41 वार्डों के चुनाव में तीन सीटें सियासी परिवारों की प्रतिष्ठा और जिला प्रमुख पद की संभावित दावेदारी के चलते खास चर्चा में हैं। वार्ड 13, 18 और 26 में प्रमुख राजनीतिक परिवारों से जुड़ी महिला उम्मीदवार मैदान में हैं। इन मुकाबलों में राजनीतिक विरासत के साथ पार्टी का जनाधार और उम्मीदवारों की अपनी पकड़ भी कसौटी पर है। भाजपा, कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के प्रत्याशियों के बीच मुकाबले ने इन सीटों को चुनावी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

वार्ड 18: डूडी परिवार की भांजी के सामने दो दल

यहां भाजपा ने पूर्व उप जिला प्रमुख इंदू तर्ड को टिकट दिया है। स्वर्गीय रामेश्वर डूडी की भांजी इंदू तर्ड के पास पहले पद पर काम करने का अनुभव है। कांग्रेस ने माया देवी और आरएलपी ने द्रोपदी देवी को प्रत्याशी बनाया है।

इस सीट पर भाजपा के सामने अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती है। वहीं, कांग्रेस और आरएलपी भी मुकाबले में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं। इंदू का राजनीतिक अनुभव और तीनों प्रत्याशियों का स्थानीय जनाधार चुनाव के प्रमुख पहलू होंगे।

कांग्रेस का प्रभाव, भाजपा के सामने चुनौती

जिला परिषद में कांग्रेस के प्रभाव को कायम रखने और भाजपा की ओर से उसे चुनौती देने की कोशिशों के बीच इन तीन सीटों के परिणाम पर विशेष नजर रहेगी। कांग्रेस के लिए निकिता चौधरी और सरिता चौहान की जीत राजनीतिक परिवारों की प्रतिष्ठा से जुड़ी होगी। वहीं, भाजपा के लिए इंदू तर्ड सहित अपने प्रत्याशियों के प्रदर्शन के जरिए जिला परिषद में अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर है। आरएलपी के प्रत्याशी भी मुकाबले में हैं, इसलिए चुनावी तस्वीर को केवल भाजपा-कांग्रेस के बीच की लड़ाई मानना अधूरा होगा।

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, कैबिनेट मंत्री सुमित गोदारा और जिले के अन्य प्रमुख नेताओं की राजनीतिक सक्रियता के बीच इन वार्डों के नतीजे जिला परिषद के व्यापक सियासी समीकरणों को समझने में भी अहम होंगे।

वार्ड 13: डूडी परिवार की विरासत की परीक्षा

यहां कांग्रेस ने स्वर्गीय रामेश्वर डूडी के परिवार की बहू निकिता चौधरी को प्रत्याशी बनाया है। उनकी उम्मीदवारी से इस सीट का मुकाबला डूडी परिवार की राजनीतिक विरासत से जुड़ गया है। भाजपा ने कमला देवी, आरएलपी ने संजू और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मोहनी देवी को मैदान में उतारा है। चार प्रत्याशियों की मौजूदगी में मुकाबले का समीकरण केवल पार्टी के परंपरागत समर्थन से तय नहीं होगा। स्थानीय जनाधार और मतदाताओं के बीच उम्मीदवारों की स्वीकार्यता भी अहम रहेगी।

वार्ड 26: मेघवाल परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर

पूगल क्षेत्र के वार्ड 26 में पूर्व कैबिनेट मंत्री गोविंदराम मेघवाल की बेटी सरिता चौहान कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। भाजपा ने निर्मला देवी और आरएलपी ने माया देवी को मैदान में उतारा है। सरिता की उम्मीदवारी से यह सीट मेघवाल परिवार की राजनीतिक प्रतिष्ठा से जुड़ गई है। हालांकि, परिवार की पहचान के साथ स्थानीय मुद्दे, मतदाताओं से संपर्क और प्रत्याशियों की व्यक्तिगत पकड़ भी परिणाम को प्रभावित करने वाले कारक होंगे।

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