17 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

कौन लगाए बेबसी पर मरहम? मां का साया छिना, बीकानेर में 2 मासूमों का भविष्य वादों के भरोसे

बीकानेर में प्रसूता शारदा की मौत के 4 महीने बाद भी पीड़ित परिवार बेसहारा है। शव रखकर प्रदर्शन के दौरान नेताओं-प्रशासन ने 50 लाख मुआवजा व संविदा नौकरी का वादा किया था। अब कोई सुध लेने नहीं आया। 5 माह के बेटे व 4 वर्ष की बेटी के पालन-पोषण का भार आर्थिक तंगी से जूझ रहे बुजुर्ग नाना-नानी पर आ पड़ा है।
2 min read
Google source verification

बीकानेर

•

image

Arvind Rao

•

image

देवेंद्र शर्मा 'शास्त्री'

•

Oct 17, 2026

bikaner maternal death case involving kidney infection

हीरालाल का परिवार और चार वर्ष की दोहित बिंदिया (पत्रिका फोटो)

-देवेंद्र शर्मा 'शास्त्री'

बीकानेर: पांच महीने का बेटा मां की ममता से महरूम है। चार वर्ष की बेटी बिंदिया से मां का आंचल छिन गया। घर में नाना-नानी के पास भी बची हैं, तो बेटी की यादें और इन बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी। यह दर्दभरी कहानी है शहर के श्रीरामसर के छोटा राणीसर बास में रहने वाले हीरालाल नायक के परिवार की। पीबीएम अस्पताल में प्रसव के बाद किडनी संक्रमण से बेटी की मौत के बाद यह परिवार पिछले चार माह से सरकारी तंत्र और नेताओं के वादों के सहारे दिन काट रहा है। अस्पताल में शव रखकर प्रदर्शन करने वाले नेता और अधिकारी आज तक इस परिवार की बेबसी पर मरहम लगाने नहीं पहुंचे हैं।

आसान नहीं थी अंतिम विदाई की घड़ी

शारदा ने एक बेटी के बाद बेटे को जन्म दिया, तो परिवार में खुशियों का माहौल था। पिता हीरालाल ने टपकते आंसुओं के बीच बताया कि वे दोहिते के जन्म की खुशी में मिठाई बांट रहे थे। इसी बीच शारदा के बीमार होने और आईसीयू में भर्ती करवाने की जानकारी मिली। किडनी संक्रमण होने से 21 जून को शारदा की मौत हो गई। बकौल हीरालाल, वे बेटी का शव लेकर घर जाना चाह रहे थे, लेकिन नेताओं ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। अस्पताल की मोर्चरी के बाहर चार दिन तक धरना दिया गया। ऐसे में उसकी अंतिम विदाई की घड़ी भी बड़ी दर्दभरी रही।

नहीं मिला मुआवजा… समाज में चला गया 'माजणा'

बकौल हीरालाल, प्रदर्शन के चौथे दिन परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी, जनसहयोग से 25 लाख और सरकार से 50 लाख रुपए का मुआवजा दिलवाने पर सहमति बनी। दो दिन बाद ही 25 लाख रुपए देने की बात कही गई। लेकिन आज तक उन्हें एक रुपया भी नहीं मिला है। ऐसे में समाज में भी उनकी इज्जत 'माजणा' कमजोर हुई है।

दूसरी बेटी का सुहाग उजड़ा… नाना-नानी पर दोहरी जिम्मेदारी

हीरालाल की बड़ी बेटी सुनीता के पति की भी करीब डेढ़ वर्ष पहले मौत हो गई थी। चार वर्ष की बेटी और दो वर्ष के बेटे के साथ सुनीता भी पहले से ही पिता के घर रहती है। ऐसे में मजदूरी कर जीवनयापन करने वाले हीरालाल पर दोहरी जिम्मेदारी आ गई है। बकौल हीरालाल, सुनीता को भी अभी तक मुआवजे के कोई पैसे नहीं मिले हैं। ऐसे में बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के साथ घर का खर्च चलाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

आश्वासन दिया था… फॉलोअप नहीं हुआ

शारदा की मौत के बाद प्रशासन ने अधिकतम 50 लाख रुपए तक का प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजने, संविदा पर एक परिजन को नौकरी देने के साथ जनसहयोग से पैसा जुटाकर इस परिवार की मदद करना तय किया था। घटना के बाद इसका फॉलोअप नहीं हो पाया।
-मदन मेघवाल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष (शहर), बीकानेर

बड़ी खबरें

View All

बीकानेर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग