
हीरालाल का परिवार और चार वर्ष की दोहित बिंदिया (पत्रिका फोटो)
-देवेंद्र शर्मा 'शास्त्री'
बीकानेर: पांच महीने का बेटा मां की ममता से महरूम है। चार वर्ष की बेटी बिंदिया से मां का आंचल छिन गया। घर में नाना-नानी के पास भी बची हैं, तो बेटी की यादें और इन बच्चों का भविष्य संवारने की जिम्मेदारी। यह दर्दभरी कहानी है शहर के श्रीरामसर के छोटा राणीसर बास में रहने वाले हीरालाल नायक के परिवार की। पीबीएम अस्पताल में प्रसव के बाद किडनी संक्रमण से बेटी की मौत के बाद यह परिवार पिछले चार माह से सरकारी तंत्र और नेताओं के वादों के सहारे दिन काट रहा है। अस्पताल में शव रखकर प्रदर्शन करने वाले नेता और अधिकारी आज तक इस परिवार की बेबसी पर मरहम लगाने नहीं पहुंचे हैं।
शारदा ने एक बेटी के बाद बेटे को जन्म दिया, तो परिवार में खुशियों का माहौल था। पिता हीरालाल ने टपकते आंसुओं के बीच बताया कि वे दोहिते के जन्म की खुशी में मिठाई बांट रहे थे। इसी बीच शारदा के बीमार होने और आईसीयू में भर्ती करवाने की जानकारी मिली। किडनी संक्रमण होने से 21 जून को शारदा की मौत हो गई। बकौल हीरालाल, वे बेटी का शव लेकर घर जाना चाह रहे थे, लेकिन नेताओं ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। अस्पताल की मोर्चरी के बाहर चार दिन तक धरना दिया गया। ऐसे में उसकी अंतिम विदाई की घड़ी भी बड़ी दर्दभरी रही।
बकौल हीरालाल, प्रदर्शन के चौथे दिन परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी, जनसहयोग से 25 लाख और सरकार से 50 लाख रुपए का मुआवजा दिलवाने पर सहमति बनी। दो दिन बाद ही 25 लाख रुपए देने की बात कही गई। लेकिन आज तक उन्हें एक रुपया भी नहीं मिला है। ऐसे में समाज में भी उनकी इज्जत 'माजणा' कमजोर हुई है।
हीरालाल की बड़ी बेटी सुनीता के पति की भी करीब डेढ़ वर्ष पहले मौत हो गई थी। चार वर्ष की बेटी और दो वर्ष के बेटे के साथ सुनीता भी पहले से ही पिता के घर रहती है। ऐसे में मजदूरी कर जीवनयापन करने वाले हीरालाल पर दोहरी जिम्मेदारी आ गई है। बकौल हीरालाल, सुनीता को भी अभी तक मुआवजे के कोई पैसे नहीं मिले हैं। ऐसे में बच्चों की जरूरतों को पूरा करने के साथ घर का खर्च चलाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
शारदा की मौत के बाद प्रशासन ने अधिकतम 50 लाख रुपए तक का प्रस्ताव बनाकर सरकार को भेजने, संविदा पर एक परिजन को नौकरी देने के साथ जनसहयोग से पैसा जुटाकर इस परिवार की मदद करना तय किया था। घटना के बाद इसका फॉलोअप नहीं हो पाया।
-मदन मेघवाल, कांग्रेस जिलाध्यक्ष (शहर), बीकानेर
Updated on:
17 Oct 2026 02:31 pm
Published on:
17 Oct 2026 02:31 pm
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