बीकानेर सहित पश्चिमी राजस्थान में तीन साल में इस बार सबसे ज्यादा पारा हाई रहा है। गर्मी के शुरुआती तेवरों ने पसीना छुड़ा दिया है। साल 2024 और 2025 में मार्च के पहले सप्ताह में 30 डिग्री के पास तापमान रहता रहा है। इस बार 37 डिग्री पर पहुंच चुका है। यानि पांच से सात डिग्री तापमान में वृदि्ध चिंताजनक है। इसके पीछे पेड़ों की कटाई को माना जा रहा है।
दिनेश कुमार स्वामी@बीकानेर. चेत्र की शुरुआत के साथ ही इस बार गर्मी के तेवरों ने आमजन के माथे पर चिंताओं का पसीना ला दिया है। फरवरी के अंतिम दिनों और मार्च के प्रथम सप्ताह में बीते तीन-चार साल के मुकाबले इस बार मौसम की तासीर कुछ ज्यादा ही गर्म सामने आई है। इन दिनों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री के पास ही रहता रहा है। परन्तु इस बार बुधवार को कई साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए तापमान 37 डिग्री पर पहुंच गया।
तापमान में पांच से सात डिग्री की बढ़ोतरी की मुख्य वजह क्षेत्र में काटी गई लाखों खेजड़ी को माना जा रहा है। इससे पश्चिमी राजस्थान का पर्यावरण संतुलन बिगड़ गया है। फरवरी और मार्च में पश्चिमी गर्म हवाओं को खेजड़ी और अन्य पेड़ रोकने में ढाल का काम करते थे। इस बार फरवरी और अब मार्च में लगातार पश्चिमी हवाएं चल रही है। इससे तापमान में औसत पांच से सात डिग्री की बढ़ोतरी होने के साथ ही सर्दी भी इस बार चंद दिनों में सिमट कर रह गई। मसलन साल 2024 और साल 2025 में जहां मार्च के पहले सप्ताह में पारा 30 डिग्री से ऊपर नहीं चढ़ा, वहीं इस बार 2 मार्च को 35 डिग्री को पार कर गया और 4 मार्च को 37 डिग्री पर पहुंच गया।
साल 2025 में मार्च के शुरुआती दिनों में पारा 30 डिग्री के अंदर ही रहा जबकि मार्च के अंतिम सप्ताह में पारा 35 डिग्री पर पहुंचा था। इसी तरह साल 2024 को देखे तो मार्च के प्रथम सप्ताह में तापमान 26 से 30 डिग्री के बीच रहा। यानि तीन साल में इस बार सबसे ज्यादा गर्मी पड़ रही है। इस बार 20 फरवरी को ही तापमान 30 डिग्री को और 1 मार्च को 35 डिग्री को पार कर गया। जबकि पिछले सालों में यह िस्थति मार्च के अंतिम सप्ताह और अप्रेल के प्रथम सप्ताह में रहती है। मौसम विश्लेषकों के अनुसार एक-डेढ़ दशक पहले ऐसे हालात होते थे। इसके बाद सिंचाई रकबा बढ़ने और पेड़-पौधों की हरियाली से हालात बदले। तामपान गिरना शुरू हुआ और सर्दी का दायरा बढ़ा। अब फिर पुराने हालात बनने शुरू हो गए है।
मौसम में आए परिवर्तन का असर रबी की फसल पर पड़ा है। इस बार 15 फरवरी के बाद से ही तापमान पिछले सालों के औसत से करीब पांच डिग्री ज्यादा रह रहा है। मार्च के शुरुआत में 35 डिग्री को पार करने के साथ ही चने की फसल में फूल सूख कर गिर गए और हरा चना पक कर तैयार हो गया। इसी तरह सरसों की फसल भी पीली पड़ गई और पककर काटने के लिए तैयार है। गर्मी के चलते इस बार रबी की फसल कटाई भी जल्दी शुरू हो गई है।
मौसम में आए बदलाव पर मौसम विज्ञानी अलग-अलग तर्क दे रहे है। कुछ लोग इसे दुनिया में चल रहे युद्धों से जोड़कर भी देख रहे है। करीब चार साल से रूस-यूक्रेन युद्ध चल रहा है। इसमें रोजाना बारूद जल रहा है। पांच दिन पहले ही ईरान और इजराइल का युद्ध शुरू हो चुका है। मिसाल हमलों से आग के बवंडर धरती से आसमान की तरफ उठ रहे है। ऐसे में वैश्विक हालात का असर भी मौसम पर पड़ रहा है।
पड़ोसी राज्य गुजरात में एंटी साइक्लोनिक सर्कुलेशन का प्रभाव शुरू हो गया है। इससे गर्मी का असर राजस्थान में जल्दी हो रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण भी तापमान में दिनों दिन बढ़ोतरी हो रही है। इन दिनों पश्चिम विक्षोभ भी सक्रिय नहीं हैं। इसका असर भी पड़ा है।- राधेश्याम शर्मा, निदेशक मौसम विभाग जयपुर
पत्रिका एक्सपर्ट व्यू
लाखों पेड़ काटने का नतीजाबीकानेर से लेकर जैसलमेर जिले तक खेजड़ी और अन्य पेड़ लाखों की तादाद में काटे गए है। मरुस्थल को बढ़ने से रोकने और पश्चिमी गर्म हवाओं से इलाके को बचाने में खेजड़ी ढाल का काम करती थी। सोलर कम्पनियों के लिए अंधाधुंध पेड़ों की कटाई से तापमान 3 से 5 डिग्री बढ़ा है, साथ ही तेज सर्दी भी दस-बारह दिनों में सिमट कर रह गई। पेड़ों की कटाई नहीं रूकी तो परिणाम और ज्यादा गंभीर हो सकते है। गर्मी बढ़ने का असर पक्षियों और जीव-जंतुओं की वंश वृदि्ध पर भी पड़ रहा है। खाजूवाला से लेकर लूणकरनसर तक और रतनगढ़ से लेकर नागौर तक, उधर बीकानेर से लेकर जैसलमेर तक तापमान में वृदि्ध ज्यादा हुई है। इसी क्षेत्र में सोलर प्लांट ज्यादा लगे है और पेड़ काटे गए है।
-प्रोफेसर अनिल छंगाणी, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय बीकानेर
वर्ष 1 से 4 मार्च के बीच तापमान
वर्ष 2024 अधिकतम 31.3 डिग्री
वर्ष 2025 अधिकतम 30.6 डिग्री
वर्ष 2026 अधिकतम 37 डिग्री