बीकानेर

प्रोटीन पाउडर से बना रहे कमीशन की सेहत

नहीं सुधर रहा सीएचसी का सिस्टम: कोड वर्ड में चल रहा मरीजों की जेब ढीली करने का खेल

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Sep 20, 2022
प्रोटीन पाउडर से बना रहे कमीशन की सेहत
प्रोटीन पाउडर से बना रहे कमीशन की सेहत

संजय पारीक
श्रीडूंगरगढ़. कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। सरकारी पर्ची के साथ अन्य पर्ची पर बाहर की दवा लिखने का सिस्टम उजागर होने के बाद अब कमीशनखोरी के लिए नया सिस्टम ईजाद किया गया है। अब चिकित्सकों द्वारा कोडवर्ड के जरिए मरीजों को सीधे मेडिकल स्टोर से प्रोटीन पाउडर दिलवाया जा रहा है और मरीज की जेब ढीली कर कमीशन की सेहत बनाई जा रही है।


जनाना विंग में प्रोटीन पाउडर का खेल
जानकारी के अनुसार सीएचसी की जनाना विंग में प्रोटीन का खेल जोरों से चल रहा है। पत्रिका संवाददाता ने सोमवार सुबह 9 से 11 बजे तक चिकित्सकों के पास जांच के लिए आ रहे मरीजों से बातचीत और पड़ताल की तो प्रोटीन पाउडर के कोड वर्ड खेल का पता चला। पत्रिका के पास प्रोटीन पाउडर और मरीज की पर्ची उपलब्ध है। हालांकि चिकित्सक द्वारा प्रोटीन पाउडर मरीज को मौखिक रूप से निश्चित दवा की दुकान से लेने की सलाह दी जाती है। जबकि आवश्यकता की दवाइयां मुख्यमंत्री निशुल्क दवा वितरण केंद्र पर उपलब्ध है लेकिन डीडीसी वाली दवा पर कमीशन की रकम नही मिलती है।


इनमें आता है प्रोटीन
शरीर में दुर्बलता आदि कम करने के लिए प्रोटीन पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोग बॉडी बनाने के लिए भी इस पाउडर का प्रयोग करते है, लेकिन यहां तो आवश्यकता हो या न हो प्रोटीन पाउडर तो आपको लेना ही पड़ेगा।


100 से 150 से रुपए तक का कमीशन
एक दवा विक्रेता ने अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि प्रोटीन पाउडर के एक डिब्बे को बेचने पर 100 से 150 रुपए तक कमीशन होता है। इस कमीशन में मरीज को छोड़कर सब की हिस्सेदारी होती है। कमीशन के लालच में मरीज की जेब पर डाका डाला जा रहा है। एक आंकड़े के अनुसार प्रतिदिन 20 प्रोटीन के डिब्बे विक्रय किए जाते हैं।


सिस्टम ऐसा कि पकड़ में न आए
मरीजों को प्रोटीन पाउडर देने के लिए चिकित्सकों ने ऐसा गजब का सिस्टम बनाया है कि हर किसी की पकड़ से बाहर है। सीएचसी के कुछ चिकित्सक कमीशन के लालच में इस गोरखधंधे को चलाने के लिए मरीज की सरकारी पर्ची पर तो सरकारी दवा लिख देते है, लेकिन पर्ची पर खास तरह का कोड लिखकर मौखिक रूप से मरीज को कह दिया जाता है कि मेडिकल स्टोर से एक प्रोटीन पाउडर भी लेना। मरीज उस मेडिकल स्टोर पर जाता है तो दवा विक्रेता तुरन्त उसे प्रोटीन पाउडर थमा देता है। जबकि सरकारी पर्ची पर इस पाउडर का कोई स्पष्ट जिक्र नहीं होता।


जांच करवाकर नियमानुसार करेंगे कार्रवाई
यदि इस तरह का खेल चल रहा है तो जांच करवाएंगे। जांच में अगर किसी चिकित्सक द्वारा इस तरह का कार्य करना पाया गया तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. अबरार पंवार, सीएमचओ, बीकानेर। न आए

Published on:
20 Sept 2022 01:06 am