बिलासपुर

7 अभियंताओं की याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, भिलाई निगम के अफसरों को नोटिस

Bhilai Engineers High Court Relief: भिलाई नगर निगम के पेवर ब्लॉक निर्माण में कथित गड़बड़ी के मामले में 7 अभियंताओं को बिलासपुर हाईकोर्ट से राहत मिली है।
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Bhilai Corporation Engineers
21 अनुबंधों में मिली थी अनियमितता (Photo Source- Patrika File Photo)

Bhilai Corporation Engineers: छत्तीसगढ़ के भिलाई नगर निगम में पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं के मामले में सात अभियंताओं को बिलासपुर हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। हाईकोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने संबंधित अभियंताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और कथित अधिक भुगतान की राशि वसूलने संबंधी निर्देशों पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही मुख्य अभियंता की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस पर भी रोक लगाई गई है। अदालत ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, दुर्ग कलेक्टर और भिलाई नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

यह मामला वित्तीय वर्ष 2023-24 में नगर निगम की परियोजना शाखा के अंतर्गत कराए गए पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है। जांच रिपोर्ट में 29 अनुबंधों में से 21 में माप पुस्तिका में दर्ज निर्माण कार्य और मौके पर मिले काम के बीच अंतर का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के आधार पर 16 लाख 85 हजार 457 रुपए के अधिक भुगतान की बात सामने आई थी।

Bhilai Municipal Corporation News: सात अभियंताओं ने हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका

इस मामले में नगर निगम भिलाई में पदस्थ उप अभियंता अर्पित बंजारे, चंदन निर्मल, श्वेता महेश्वर, पुरुषोत्तम सिंहा, रीमा हुमने और कृष्ण कुमार जंघेल के साथ सहायक अभियंता श्वेता वर्मा ने हाईकोर्ट का रुख किया था। अभियंताओं ने अधिवक्ता सिबाशीष मिश्रा के माध्यम से याचिका दायर कर उनके खिलाफ प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्रवाई और अधिक भुगतान की राशि वसूलने संबंधी निर्देशों को चुनौती दी।याचिका में कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि जांच के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने संबंधित निर्देशों और कारण बताओ नोटिस पर अंतरिम रोक लगाते हुए अधिकारियों से जवाब तलब किया है।

पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों की जांच में सामने आई थी गड़बड़ी

भिलाई नगर निगम की परियोजना शाखा के तहत वर्ष 2023-24 में शहर की सड़कों, फुटपाथों और चौक-चौराहों पर पेवर ब्लॉक लगाने के कार्य कराए गए थे। इन निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद दुर्ग कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिए थे। जांच के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन अभियंताओं की संयुक्त टीम बनाई गई।

टीम ने निर्माण स्थलों का भौतिक सत्यापन किया और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। जांच प्रतिवेदन में माप पुस्तिका में दर्ज निर्माण की मात्रा और मौके पर वास्तविक रूप से किए गए कार्य के बीच अंतर मिलने की बात कही गई। इसी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित अभियंताओं की जिम्मेदारी तय करने और कथित अधिक भुगतान की राशि वसूलने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई थी।

29 अनुबंधों में से 21 में अनियमितता का उल्लेख

संयुक्त जांच प्रतिवेदन के अनुसार, कुल 29 अनुबंधों की जांच की गई थी। इनमें से 21 अनुबंधों में माप पुस्तिका में दर्ज मात्रा की तुलना में मौके पर कम निर्माण कार्य पाए जाने का उल्लेख किया गया। रिपोर्ट में कुल 16 लाख 85 हजार 457 रुपए के अधिक भुगतान की बात सामने आई। इसके बाद दुर्ग कलेक्टर ने 3 सितंबर 2026 को नगर निगम आयुक्त को पत्र लिखकर संबंधित अभियंताओं के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और कथित अधिक भुगतान की राशि की वसूली के निर्देश दिए थे। हालांकि, जांच रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों और अभियंताओं की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को लेकर अंतिम न्यायिक निर्णय अभी नहीं हुआ है।

मुख्य अभियंता ने जारी किया था कारण बताओ नोटिस

कलेक्टर के निर्देशों के बाद मुख्य अभियंता ने सातों अभियंताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर जवाब मांगा था। इसके बाद अभियंताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जांच प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। उनका तर्क था कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और वसूली के निर्देश जारी किए जाने के बाद कारण बताओ नोटिस की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।

वकीलों ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का दिया हवाला

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी और अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक ने पैरवी की। उन्होंने अदालत के सामने दलील दी कि अभियंताओं को जांच के दौरान अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने तर्क दिया कि जब कार्रवाई की दिशा पहले ही तय कर दी गई हो, तब कारण बताओ नोटिस जारी करना महज औपचारिकता बनकर रह सकता है। उन्होंने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताते हुए संबंधित निर्देशों को चुनौती दी। अदालत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद मामले में अंतरिम राहत दी और संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए।

Bhilai Nigam News: हाईकोर्ट ने कार्रवाई और वसूली पर लगाई अंतरिम रोक

जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने दुर्ग कलेक्टर के 3 सितंबर 2026 के पत्र में उल्लेखित अनुशासनात्मक कार्रवाई और कथित अधिक भुगतान की वसूली संबंधी निर्देशों पर रोक लगा दी। इसके साथ ही मुख्य अभियंता की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस पर भी अंतरिम रोक लगाई गई है। अदालत ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, दुर्ग कलेक्टर और भिलाई नगर निगम के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

इस आदेश से सातों अभियंताओं को फिलहाल राहत मिली है। हालांकि, यह अंतरिम आदेश है। हाईकोर्ट ने अभी निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं या अभियंताओं की जिम्मेदारी पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। अब संबंधित अधिकारियों के जवाब और आगामी सुनवाई के बाद मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

Updated on:
21 Oct 2026 03:11 pm
Published on:
21 Oct 2026 03:11 pm