High Court: सूचना के अधिकारी आरटीआई के संबंध में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने बिलासपुर कुदुदंड स्थित चर्च ऑफ़ क्राईस्ट मिशन से संबंधित एक मामले में कुछ इस तरह व्यवस्था दी है।
Bilaspur High Court: सूचना के अधिकार पर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अगर कोई व्यक्ति अधिनियम अनुसार आवेदन प्रस्तुत करता है तो उसे जानकारी देनी होगी। कुदुदंड स्थित चर्च ऑफ ख्राइस्ट ने यह कहते हुए जानकारी देने से इंकार कर दिया था कि उसे केंद्र और राज्य शासन से किसी तरह का अनुदान नहीं मिलता है। साथ ही जानकारी मांगने वाला व्यक्ति संस्था से संबंधित नहीं है।
चर्च ऑफ ख्राइस्ट मिशन द्वारा कुदुदंड में संचालित अलग-अलग प्राथमिक स्कूलों और शेफर स्कूल के आय-व्यय का ब्यौरा लेने आरटीआई के तहत जानकारी मांगी गई थी।
इसे संस्था ने देने से यह कहकर इंकार कर दिया था कि, यह कोई शासकीय संस्थान नहीं है। इसके अलावा इसे कोई अनुदान भी नहीं मिलता। संस्था द्वारा सूचना नहीं प्रदान करने पर सूचना आयोग में आवेदन प्रस्तुत किया गया। सुनवाई के बाद सूचना आयोग ने संस्था को नोटिस जारी कर जानकारी नहीं देने पर 10 हजार रुपये का जुर्माना किया। सूचना आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए चर्च ऑफ ख्राइस्ट ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्रस्तुत आवेदन पर कोई भी संस्था जानकारी देने के लिए उत्तरदायी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि भविष्य में यदि कोई व्यक्ति अधिनियम 2005 के तहत कोई जानकारी मांगता है तो संबंधित सोसायटी सूचना देने के लिए उत्तरदायी होगी। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका निराकृत कर दी।
मामले की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच में सुनवाई हुई। संस्था की ओर से प्रस्तुत जवाब में कहा गया कि गैर अनुदान प्राप्त संस्थान होने के कारण आय-व्यय का लेखा-जोखा सूचना के अधिकार में नहीं दिया जा सकता। आरटीआई के तहत जानकारी मांगने वाला आवेदनकर्ता संस्था का सदस्य भी नहीं है।