बिलासपुर

Bilaspur High Court: 219 दिन देरी से दायर राज्य की रिवीजन याचिका हाईकोर्ट ने खारिज की, जानें क्या कहा?

High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 219 दिन की देरी से दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया।
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हाईकोर्ट (photo-patrika)
हाईकोर्ट (photo-patrika)

Bilaspur High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक फैसले में राज्य सरकार द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को 219 दिन की देरी के कारण खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकलपीठ ने स्पष्ट कहा कि सरकारी विभागों को भी समयसीमा का पालन करना होगा और केवल फाइल प्रक्रिया में समय लगने का तर्क देरी माफ करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

मामला अंबिकापुर के किशोर न्याय बोर्ड के उस फैसले से जुड़ा था, जिसमें दो नाबालिग आरोपियों को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से बरी कर दिया गया था। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर की थी, लेकिन यह निर्धारित समयसीमा से 219 दिन बाद दाखिल की गई।

कोर्ट ने कहा-कानून की समय सीमा सभी पर समान रूप से लागू होती है

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि शासन एक बहुस्तरीय संस्था है और याचिका दाखिल करने से पहले विभिन्न प्रशासनिक स्वीकृतियों की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है, जिसके कारण देरी हुई। राज्य ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देकर देरी माफ करने की मांग की। हालांकि हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी विभागों को विशेष छूट नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि, कानून की समयसीमा सभी पर समान रूप से लागू होती है, चाहे वह आम व्यक्ति हो या सरकार।

अधिक जवाबदेही और तत्परता दिखानी चाहिए

हाईकोर्ट ने कहा कि सरकारी विभागों को कानूनी मामलों में अधिक जवाबदेही और तत्परता दिखानी चाहिए। अदालत ने राज्यों को निर्देशित किया किअनावश्यक देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करें।

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Published on:
11 May 2026 02:40 pm