
Snake Bite Compensation Scam: बिलासपुर तहसील कार्यालय में सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच का असर अब कामकाज पर भी दिखाई देने लगा है। घोटाले में हुई गिरफ्तारियों और कर्मचारियों की कमी के चलते तहसील कार्यालय में स्टाफ का संकट खड़ा हो गया था। स्थिति ऐसी हो गई कि पिछले करीब एक महीने से रिकॉर्ड रूम का ताला तक नहीं खुल पा रहा था। हालांकि, अब प्रशासन ने व्यवस्था को संभालने की कोशिश शुरू कर दी है। कलेक्टर के निर्देश पर तहसील कार्यालय को चार नए लिपिक मिले हैं। वहीं, रिकॉर्ड रूम की जिम्मेदारी पटवारी को सौंपी गई है, ताकि जरूरी दस्तावेजों का काम दोबारा शुरू हो सके।
जानकारी के मुताबिक, युक्तीयुक्तकरण की प्रक्रिया के तहत तहसील कार्यालय में काम कर रहे पांच शिक्षक अपने मूल विभाग में वापस लौट गए हैं। दूसरी ओर, सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच के दौरान तीन लिपिकों के जेल जाने और कुछ अन्य कर्मचारियों के कार्यालय से नदारद रहने के कारण स्टाफ की कमी और बढ़ गई। इसका सीधा असर तहसील के रोजमर्रा के काम पर पड़ा। कई जरूरी प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने लगे और आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
कर्मचारियों की कमी का सबसे ज्यादा असर रिकॉर्ड रूम के काम पर पड़ा। पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण पिछले करीब एक महीने से रिकॉर्ड रूम बंद पड़ा था। इससे जमीन-जायदाद से जुड़े दस्तावेजों के लिए तहसील पहुंचने वाले लोगों और वकीलों को परेशानी हो रही थी। नामांतरण, बटांकन, नक्शा-खसरा और बी-1 की प्रमाणित प्रतियां जैसे जरूरी दस्तावेजों के लिए लोगों को इंतजार करना पड़ रहा था।
स्थिति बिगड़ने के बाद एसडीएम मनीष साहू ने कर्मचारियों की कमी की जानकारी कलेक्टर को दी थी और अतिरिक्त स्टाफ की मांग की थी। इसके बाद कलेक्टर कार्यालय के निर्देश पर तहसील कार्यालय को चार नए लिपिक उपलब्ध कराए गए हैं। वहीं, रिकॉर्ड रूम का प्रभार पटवारी को सौंप दिया गया है। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे जरूरी दस्तावेजों की आवाजाही और आम लोगों से जुड़े काम फिर से सामान्य हो सकेंगे।
सर्पदंश मुआवजा मामले में 17 करोड़ रुपये से ज्यादा के फर्जीवाड़े की जांच चल रही है। मामले में लगातार गिरफ्तारियां होने के बाद तहसील कार्यालय के कर्मचारियों के बीच भी चिंता का माहौल है। जांच की आंच आगे बढ़ने के साथ कई कर्मचारी कार्यालय आने से बच रहे हैं या जिम्मेदारियों से दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसका असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ा है।
एसडीएम मनीष साहू ने कहा कि कर्मचारियों की कमी और जांच के बाद बनी स्थिति के कारण कुछ समय के लिए कामकाज प्रभावित जरूर हुआ था। कलेक्टर कार्यालय के निर्देश पर अब चार नए लिपिक मिल गए हैं और रिकॉर्ड रूम का प्रभार पटवारी को सौंप दिया गया है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था को सुचारू कर दिया गया है और नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।