
कस्टडी डेथ केस में CBI ने खंगाली केस डायरी (photo source- Patrika)
Bilaspur Custody Death Case: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस कस्टडी के बाद युवक की मौत के मामले में अब CBI ने जांच शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद चार सदस्यीय CBI टीम शुक्रवार को बिलासपुर पहुंची। SP रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में टीम ने सिविल लाइन थाने से केस डायरी समेत जरूरी दस्तावेज जुटाए। इसके बाद टीम सेंट्रल जेल पहुंची और जेल अधीक्षक व कर्मचारियों से घटना से जुड़ी जानकारी ली।
मामला ग्राम मोहरा निवासी 35 वर्षीय श्रवण तांबे की मौत से जुड़ा है। परिजनों का आरोप है कि श्रवण को सीपत थाने में करीब 36 घंटे तक हिरासत में रखा गया और उसके साथ मारपीट की गई। पुलिस के मुताबिक, 18 जनवरी 2024 को श्रवण को 6 लीटर महुआ शराब के साथ गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर 19 जनवरी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
20 जनवरी को परिजन श्रवण से मिलने सेंट्रल जेल पहुंचे, लेकिन उन्हें मुलाकात नहीं करने दी गई। इसके अगले दिन 21 जनवरी को जेल में उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। पहले जेल अस्पताल में इलाज किया गया और हालत गंभीर होने पर उसे सिम्स रेफर किया गया। 22 जनवरी को सिम्स में इलाज के दौरान श्रवण की मौत हो गई। जेल प्रबंधन के अनुसार उसे सांस लेने में परेशानी थी और इसी वजह से अस्पताल ले जाया गया था।
मामले की न्यायिक जांच प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट निकसन डेविड लकड़ा ने की थी। 22 जुलाई 2024 को पेश रिपोर्ट में पोस्टमार्टम, FSL और हिस्टोपैथोलॉजी समेत अन्य साक्ष्यों के आधार पर मौत की वजह सिर में लगी गंभीर चोट और उससे उत्पन्न जटिलताओं को बताया गया था। रिपोर्ट में मृतक के परिजनों और अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए थे।
श्रवण की पत्नी लहरा बाई और बेटी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था और पुलिसकर्मियों की लापरवाही को जिम्मेदार माना था। इसके बाद परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान न्यायिक जांच रिपोर्ट के बावजूद FIR दर्ज नहीं होने पर सवाल उठाए गए। कोर्ट ने CBI को पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही उन पुलिस अधिकारियों की भूमिका की जांच करने को कहा है, जिन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कार्रवाई नहीं की।
सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर की अगली सुनवाई से पहले CBI को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। राज्य सरकार को मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है। अब CBI केस डायरी, न्यायिक जांच रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पुलिसकर्मियों की भूमिका तथा कार्रवाई में हुई कथित देरी की जांच करेगी।
Updated on:
15 Aug 2026 12:56 pm
Published on:
15 Aug 2026 12:55 pm
