
सर्पदंश मुआवजा घोटाला (photo source- Patrika)
Snakebite Compensation Scam: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सामने आए बहुचर्चित सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़ा मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। मामले में बिलासपुर तहसील कार्यालय के तीन कर्मचारियों गरीब बिंझवार, नरेंद्र कौशिक और हरिराम राठौर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। गिरफ्तारी के बाद राजस्व विभाग ने तीनों कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित भी कर दिया है। इस कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय के कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, लिपिक संघ ने गिरफ्तार कर्मचारियों के समर्थन में मोर्चा खोलते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पुलिस ने तीनों कर्मचारियों को पूछताछ के बाद अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। विभाग ने भी गिरफ्तारी के बाद सेवा नियमों के तहत तीनों को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। इससे पहले इसी मामले में गोविंद विश्वकर्मा, वकील खांडेकर और डॉ. प्रियंका सोनी की गिरफ्तारी हो चुकी है। यानी अब तक इस मामले में कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है और जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े में अभी कई पहलुओं की जांच जारी है। पुलिस को सात अन्य बाबुओं के बयान दर्ज करने हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन बयानों के बाद मामले में और नए तथ्य सामने आ सकते हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे फर्जी मुआवजा स्वीकृत करने की प्रक्रिया और उसमें शामिल लोगों की भूमिका भी स्पष्ट होती जा रही है।
लगातार हो रही गिरफ्तारियों और विभागीय कार्रवाई के बाद तहसील कार्यालय के कर्मचारियों में चिंता का माहौल है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि कई कर्मचारी संभावित कार्रवाई से बचने के लिए अपने तबादले की कोशिश में भी जुट गए हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने सात तहसीलदारों को भी नोटिस जारी किया है। उनसे फर्जी मुआवजा प्रकरण से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। नोटिस जारी होने के बाद छत्तीसगढ़ कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने इसका विरोध जताया और वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। संघ का कहना है कि जांच तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए और किसी भी अधिकारी के साथ पूर्वाग्रह नहीं होना चाहिए।
तहसील कार्यालय के तीन कर्मचारियों की गिरफ्तारी के विरोध में लिपिक संघ भी खुलकर सामने आ गया है। सोमवार को संघ के बैनर तले तहसील कार्यालय के कर्मचारियों ने पूरे दिन कामकाज बंद रखकर विरोध प्रदर्शन किया। संघ ने मांग की कि राजस्व लिपिकों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराई जाए।
लिपिक संघ का कहना है कि बिना पूरी जांच के कर्मचारियों को आरोपी बनाया जा रहा है, जिससे पूरे राजस्व अमले में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर जाने सहित बड़े आंदोलन की रणनीति बना सकते हैं।
फिलहाल पुलिस और प्रशासन पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं दूसरी ओर कर्मचारी संगठन निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां या नए खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
Updated on:
28 Jul 2026 01:43 pm
Published on:
28 Jul 2026 01:43 pm
