बिलासपुर

अश्लील संदेश, हत्या की धमकी और सोने की मांग… छत्तीसगढ़ के ब्लैकमेलिंग केस में आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से झटका

Anticipatory Bail Rejected: पत्नी को अश्लील व्हाट्सएप मैसेज भेजने, 2.50 लाख रुपये और 2 किलो सोना मांगने तथा परिवार को जान से मारने की धमकी देने के आरोपों से जुड़ा है मामला।
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Supreme Court Bail Order
छत्तीसगढ़ ब्लैकमेलिंग केस में सुप्रीम कोर्ट का फैसला (Photo Source- Patrika File Photo)

Supreme Court Bail Order: छत्तीसगढ़ के चांपा में ब्लैकमेलिंग और धमकी देने के एक मामले में आरोपित छत्तापल चंद्रा को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। पत्नी को व्हाट्सएप पर अश्लील और अपमानजनक संदेश भेजने, अश्लील वीडियो प्रसारित करने की धमकी देने और 2.50 लाख रुपये के साथ दो किलो सोने की मांग करने के आरोपों से जुड़े इस मामले में शीर्ष अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने 5 अक्टूबर 2026 को आरोपित की विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का 31 अगस्त 2026 का आदेश बरकरार रहा।

Champa Blackmailing Case: पत्नी को भेजे गए अश्लील संदेश, रुपये और सोने की मांग का आरोप

अभियोजन के अनुसार, प्रकाश इंडस्ट्रीज चांपा में प्रबंधक विनय कुमार बाजपेयी ने 28 अप्रैल 2026 को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 17 से 27 अप्रैल के बीच किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी पत्नी के व्हाट्सएप पर अश्लील और गाली-गलौज वाले संदेश भेजे। आरोप है कि संदेश भेजने वाले ने अश्लील वीडियो प्रसारित करने की धमकी देकर 2.50 लाख रुपये और दो किलो सोने की मांग की।

मांग पूरी नहीं करने पर परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई। शिकायत के मुताबिक, उनके बेटे की हत्या कर शव हनुमानधारा नदी में फेंकने की धमकी दी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू की और संदेश भेजने में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल खंगाली।

व्हाट्सएप अकाउंट के इस्तेमाल से जुड़ी जांच

पुलिस की जांच में मोबाइल नंबर के धारक राहुल बरेठ का नाम सामने आया। अभियोजन के मुताबिक, राहुल बरेठ ने बताया कि उसने अपना व्हाट्सएप अकाउंट सह-आरोपित जानकी सिदार को इस्तेमाल करने दिया था।अभियोजन ने आरोप लगाया कि जानकी सिदार ने भूमिका चंद्रा और छत्तापल चंद्रा के साथ मिलकर कथित तौर पर अश्लील संदेश भेजने, धमकी देने और रुपये व सोना वसूलने की साजिश रची। इसी आधार पर मामले में आरोपितों की भूमिका की जांच की गई। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की सत्यता पर अंतिम न्यायिक निर्णय अभी नहीं हुआ है।

सह-आरोपितों को जमानत मिलने का दिया गया तर्क

छत्तापल चंद्रा की ओर से हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की मांग करते हुए कहा गया था कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है और उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। बचाव पक्ष ने यह तर्क भी दिया था कि सह-आरोपित जानकी सिदार और भूमिका चंद्रा को नियमित जमानत मिल चुकी है।

इसलिए समानता के आधार पर छत्तापल चंद्रा को भी अग्रिम जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। वहीं, राज्य सरकार ने इस मांग का विरोध किया। अभियोजन पक्ष का कहना था कि आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, जांच जारी है और मामले की पड़ताल के लिए आरोपित से हिरासत में पूछताछ की जरूरत पड़ सकती है।

हाई कोर्ट ने भी अग्रिम जमानत देने से किया था इनकार

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने 31 अगस्त 2026 को छत्तापल चंद्रा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता और जारी जांच को ध्यान में रखते हुए राहत देने का आधार नहीं पाया। अदालत ने यह भी माना कि सह-आरोपितों को नियमित जमानत मिलने भर से छत्तापल चंद्रा को समान आधार पर अग्रिम जमानत का अधिकार नहीं मिल जाता। हाई कोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए आरोपित ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

Obscene Messages Case: 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

मामले में सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने सुनवाई की। शीर्ष अदालत ने उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करने के बाद अग्रिम जमानत देने का आधार नहीं पाया और 5 अक्टूबर 2026 को विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद छत्तापल चंद्रा को अग्रिम जमानत नहीं मिल सकी। हाई कोर्ट का पहले का आदेश भी बरकरार रहा।

यह मामला अश्लील संदेश भेजने, कथित ब्लैकमेलिंग, रुपये और सोने की मांग तथा परिवार को धमकी देने के आरोपों से जुड़ा है। फिलहाल अदालतों के सामने जमानत का सवाल था। आरोपित के खिलाफ लगाए गए आरोप सही हैं या नहीं, इस पर अंतिम फैसला होना अभी बाकी है।

Updated on:
11 Oct 2026 06:15 pm
Published on:
11 Oct 2026 05:30 pm