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Chhattisgarh News: अनोखी पहल… शाम 4 बजते ही थम जाते हैं कदम, खेतों से दुकानों तक यहां गूंजता है ‘वंदे मातरम्’

Bilaspur News: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के ग्राम लखराम में शाम 4 बजते ही अनोखा नजारा देखने को मिलता है। खेतों में काम कर रहे किसान, स्कूलों में विद्यार्थी और दुकानों पर व्यापारी अपने काम रोककर सावधान मुद्रा में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन करते हैं।
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Bilaspur News

खेतों से दुकानों तक यहां गूंजता है ‘वंदे मातरम्’ (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Chhattisgarh News: खेतों में काम करते किसानों के हाथ थम जाते हैं, दुकानों पर कारोबार कुछ पल के लिए रुक जाता है और स्कूलों में विद्यार्थी सावधान मुद्रा में खड़े हो जाते हैं। शाम के ठीक चार बजते ही लाउडस्पीकर पर ‘वंदे मातरम्’ की गूंज पूरे गांव में फैलती है। कोई चौक पर है, कोई खेत में, तो कोई अपने कार्यस्थल पर-लेकिन इस पल सभी का स्वर एक होता है। करीब 2000 लोगों की सहभागिता वाली यह अनूठी तस्वीर जनपद पंचायत बिल्हा के ग्राम लखराम की है, जहां राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन ने पूरे गांव को एक सूत्र में पिरो दिया है।

यह सिलसिला गुरुवार से शुरू हुआ। शहर से लगे ग्राम लखराम की इस पहल की सबसे खास बात यह है कि राष्ट्रगीत गाने के लिए ग्रामीणों को किसी एक स्थान पर एकत्र नहीं होना पड़ता। गांव में जो जहां मौजूद रहता है, वहीं रुककर सावधान मुद्रा में राष्ट्रगीत का गायन करता है। खेतों में काम कर रहे किसान, स्कूलों के विद्यार्थी, स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी, बैंककर्मी, व्यापारी और आम नागरिक एक ही समय पर इस सामूहिक गतिविधि का हिस्सा बनते हैं।

गांव के विभिन्न हिस्सों में लगाए गए लाउडस्पीकर से शाम चार बजे राष्ट्रगीत बजाया जाता है। इसकी आवाज सुनते ही लोग अपने काम के बीच कुछ पल निकालकर राष्ट्रगीत के सम्मान में खड़े होते हैं। रोजमर्रा की व्यस्तता के बीच यह छोटा-सा विराम गांव में सामूहिकता और राष्ट्रभावना का अनूठा संदेश देता है।

ग्रामसभा में निर्णय, फिर शुरू हुई पहल

राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ग्राम पंचायत ने इस पहल की शुरुआत की। सरपंच रुकमणि साहू, पंचों और ग्रामवासियों ने ग्रामसभा में निर्णय लेकर इसकी तैयारी की। गांव के अलग-अलग हिस्सों में राष्ट्रगीत की आवाज पहुंचाने के लिए व्यवस्था बनाई गई, ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें शामिल हो सकें। सरपंच रुकमणि साहू का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों और युवाओं में राष्ट्र्रभक्ति की भावना को प्रोत्साहित करना है। ग्रामीणों का भी मानना है कि रोजाना राष्ट्रगीत के सामूहिक गायन से नई पीढ़ी में देश के प्रति सम्मान और जिम्मेदारी का भाव मजबूत होगा।

चार बजे गांव की दिनचर्या में जुड़ता है देशप्रेम का एक पल

लखराम में शाम चार बजे का यह आयोजन केवल राष्ट्रगीत के गायन तक सीमित नहीं है। यह अलग-अलग कामों में व्यस्त ग्रामीणों को एक साझा भावना से जोडऩे की कोशिश भी है। खास बात यह है कि इसके लिए न किसी बड़े आयोजन की जरूरत है और न ही सभी लोगों को एक जगह जुटाने की। गांव के अलग-अलग कोनों से उठते स्वर जब एक साथ ‘वंदे मातरम्’ गाते हैं, तो संदेश साफ होता है- एकजुटता के लिए दूरी मायने नहीं रखती, भावना मायने रखती है। लखराम की यह पहल बताती है कि रोजमर्रा की जिंदगी में भी देशप्रेम के लिए कुछ पल निकाले जा सकते हैं और छोटी-सी सामूहिक पहल पूरे गांव की पहचान बन सकती है।

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