
Bharat Tiwari: बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले की गूंज अब छत्तीसगढ़ तक पहुंच गई है। मामले को लेकर ब्राह्मण समाज के नेतृत्व में सर्व समाज की एक आपात बैठक आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने भाग लिया। बैठक में भरत तिवारी की मौत को लेकर चिंता व्यक्त की गई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग उठाई गई।
बैठक में उपस्थित लोगों ने भरत तिवारी एनकाउंटर को संदेहास्पद बताते हुए घटना की कड़े शब्दों में निंदा की। इस दौरान भरत तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन भी रखा गया। वक्ताओं ने कहा कि इस घटना ने देशभर के लोगों को झकझोर दिया है और मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि भरत तिवारी के परिजनों को आर्थिक सहायता के रूप में 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए। इसके लिए राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन तैयार किया गया है, जिसे जल्द ही राज्यपाल के माध्यम से सौंपा जाएगा। सामाजिक संगठनों का कहना है कि परिवार को न्याय और आर्थिक संबल दोनों मिलना चाहिए।
दरअसल, बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित बिलौटी गांव में 17 जून को पुलिस कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस का दावा है कि कार्रवाई के दौरान मुठभेड़ जैसी स्थिति बनने पर आत्मरक्षा में गोली चलाई गई थी।
वहीं परिजनों और ग्रामीणों का आरोप है कि भरत तिवारी ने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मारी गई। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें भरत तिवारी के आत्मसमर्पण करने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे।
मामले में बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कार्रवाई को लेकर गंभीरता दिखाई है। एडीजी सुधांशु कुमार ने स्वीकार किया कि 16 जून को भरत तिवारी के साथ बातचीत करने पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को सही तरीके से नहीं संभाला, जो एक गंभीर चूक थी। इस मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए एक थाना प्रभारी (SHO), दो सब-इंस्पेक्टर, एक एएसआई और एक कॉन्स्टेबल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
मामले ने तूल पकड़ने के बाद राज्य मानवाधिकार आयोग ने भी स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने बिहार के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग इस मामले की अगली सुनवाई और समीक्षा 13 जुलाई को करेगा।
भरत तिवारी मामले को लेकर अब छत्तीसगढ़ में भी सामाजिक संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है। सर्व समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय हुआ है तो उसे न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग दोहराई है। मामले को लेकर तैयार किया गया ज्ञापन जल्द ही राज्यपाल को सौंपा जाएगा, ताकि इसे राष्ट्रपति तक पहुंचाया जा सके। इससे साफ है कि भरत तिवारी एनकाउंटर मामला अब बिहार से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है।