High Court: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने बच्चों की करंट लगने से हुई मौतों से जुड़े मामलों पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की थी। राज्य सरकार की प्रभावी कार्रवाई के बाद इसे रिकॉर्ड में लेकर कोर्ट ने प्रकरण निराकृत कर दिया है।
CG High Court: छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट ने बच्चों की करंट लगने से हुई मौतों से जुड़े मामलों पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की थी। राज्य सरकार की प्रभावी कार्रवाई के बाद इसे रिकॉर्ड में लेकर कोर्ट ने प्रकरण निराकृत कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा, जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने यह स्वत: संज्ञान जनहित याचिका वर्ष 2025 में दो समाचारों के आधार पर शुरू की थी, जिनमें बच्चों की करंट लगने से मौत की घटनाएं सामने आईं।
पहला मामला कोंडागांव जिले का है, जहां ढाई साल के एक बच्चे की आंगनबाड़ी केंद्र के अंदर खुले बिजली के तार के संपर्क में आने से मौत हो गई। बताया गया कि बच्चा केंद्र के अंदर खेलते समय अचानक करंट लगने से गिर पड़ा। आंगनबाड़ी केंद्र में खुले तार, खराब स्विच और असुरक्षित बिजली फिटिंग को लेकर कई बार शिकायत की गई लेकिन अधिकारियों ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
इस पर अदालत ने कहा कि समाचार रिपोर्ट से आंगनबाड़ी केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों की बेहद चिंताजनक स्थिति सामने आई है। अदालत ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के लिए बनाए गए और माता-पिता भरोसे के साथ अपने बच्चों को वहां छोड़ते हैं कि उनकी ठीक से देखभाल होगी।
राज्य के मुख्य सचिव ने कोर्ट को बताया कि संबंधित आंगनबाड़ी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई। साथ ही राज्यभर के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बिजली व्यवस्था की जांच के निर्देश दिए गए और मृतक बच्चे के परिवार को एक लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी गई।
दूसरा मामला करगीकला गांव का था जहां छह साल के बच्चे की खेत में खेलते समय बिजली के तार के संपर्क में आने से मौत हो गई। जांच में सामने आया कि खेत के मालिक ने फसल की सुरक्षा के लिए अवैध रूप से बिजली से जुड़ी झटका मशीन और तार वाली बाड़ लगाई। मुख्य सचिव ने अदालत को बताया कि इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएन्स) की धारा 105 के तहत एफआईआर दर्ज की। साथ ही मृतक बच्चे की मां को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी गई।
सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने कहा कि खेतों में फसलों की सुरक्षा के लिए अवैध रूप से बिजली के तार लगाने और पानी में करंट छोडक़र अवैध मछली पकडऩे जैसी घटनाएं बढ़ती जा रही है।