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बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शादी का वादा कर बनाए संबंध हमेशा रेप नहीं, 20 साल बाद आरोपी दोषमुक्त

High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने कहा है कि शादी का झांसा देकर फिजिकल रिलेशन हमेशा ही रेप नहीं होता। क्योंकि पीड़िता की उम्र कथित घटना की तारीख को लगभग 26 साल थी और वह बालिग है।

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हाईकोर्ट (photo-patrika)

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CG High Court: बिलासपुर हाईकोर्ट ने कहा है कि शादी का झांसा देकर फिजिकल रिलेशन हमेशा ही रेप नहीं होता। क्योंकि पीड़िता की उम्र कथित घटना की तारीख को लगभग 26 साल थी और वह बालिग है। उसे फिजिकल रिलेशन के नतीजे के बारे में पता था। इसके साथ कोर्ट ने आरोपी की अपील को स्वीकार कर करते हुए निचली अदालत से सुनाई गई सजा को रद्द किया है।

जानें पूरा मामला

सरगुजा निवासी युवती ने आरोपी लीना राम के खिलाफ शादी का झांसा देकर रेप करने की रिपोर्ट लिखाई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि वह जब 12 वीं की पढ़ाई कर रही थी तो आरोपी भी वहां पढ़ रहा था। उसने 8 सितंबर 2000 से लेकर 14 अप्रैल 2004 तक शादी का झांसा देकर लगातार शारीरिक संबंध बनाया। पुलिस ने विवेचना उपरांत आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया। सत्र न्यायालय ने आरोपी को धारा 376 में 7 वर्ष कैद एवं 5000 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।

सजा के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि अभियोजन यह साबित करने में असमर्थ है कि आरोपी ने पीडि़ता के साथ फिजिकल रिलेशनशिप सिर्फ अपनी इच्छा पूरी करने के लिए बनाया था, शादी करने का इरादा नहीं था। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को आईपीसी की धारा 376 के तहत अपराध करने के लिए दोषी ठहराकर गैर-कानूनी काम किया है, इसलिए ट्रायल कोर्ट का विवादित ऑर्डर रद्द किया जाता है।