
Panchayat Employee Transfer: छत्तीसगढ़ में एक पंचायत कर्मचारी के महज 13 महीने के भीतर छह बार तबादले का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। बार-बार स्थानांतरण से परेशान कर्मचारी को फिलहाल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत मिली है। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने कर्मचारी के दो तबादला आदेशों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। साथ ही राज्य सरकार को नोटिस जारी कर मामले में जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। मामला पंचायत कर्मचारी राजेश कुमार चौहान से जुड़ा है। उनकी ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बार-बार किए गए तबादलों को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य सरकार ने केवल 13 महीने की अवधि में उनका छह बार तबादला किया, जिसके बाद उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
याचिकाकर्ता राजेश कुमार चौहान की ओर से अधिवक्ता दीपाली पांडेय ने हाईकोर्ट के समक्ष पक्ष रखा। याचिका में बताया गया कि चौहान का महज 13 महीने के भीतर छह बार तबादला किया गया है। बार-बार तबादले के कारण कर्मचारी को अलग-अलग स्थानों पर पदस्थापना का सामना करना पड़ा। इसी को चुनौती देते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के दौरान लगातार हो रहे तबादलों को लेकर न्यायालय ने भी संज्ञान लिया।
राजेश कुमार चौहान ने राज्य सरकार के 6 अगस्त 2026 को जारी तबादला आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस आदेश के तहत उनका स्थानांतरण ग्राम पंचायत कोसमनारा से जनपद पंचायत रायगढ़ किया गया था। कर्मचारी ने इस आदेश के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया और मामला न्यायालय में विचाराधीन हो गया। लेकिन याचिका पर सुनवाई और अंतिम निर्णय से पहले ही सरकार की ओर से एक और तबादला आदेश जारी कर दिया गया।
मामले का सबसे अहम पहलू यह रहा कि कर्मचारी की याचिका हाईकोर्ट में लंबित थी, इसी दौरान 17 अगस्त 2026 को एक और तबादला आदेश जारी कर दिया गया। नए आदेश के तहत राजेश कुमार चौहान को जनपद पंचायत रायगढ़ से कोलाईबहाल स्थानांतरित कर दिया गया। यानी पहले 6 अगस्त को उन्हें ग्राम पंचायत कोसमनारा से रायगढ़ भेजा गया और फिर महज कुछ दिनों बाद 17 अगस्त को दोबारा उनकी पदस्थापना बदल दी गई। लगातार जारी हो रहे तबादला आदेशों के बाद कर्मचारी ने मामले में हाईकोर्ट से राहत की मांग की।
मामले की सुनवाई जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 6 अगस्त 2026 और 17 अगस्त 2026 को जारी दोनों तबादला आदेशों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। इस अंतरिम आदेश से राजेश कुमार चौहान को फिलहाल राहत मिली है। इसका मतलब है कि अगली सुनवाई तक इन दोनों तबादला आदेशों के आधार पर की जाने वाली कार्रवाई स्थगित रहेगी। हालांकि, मामले में अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर याचिका में लगाए गए आरोपों और बार-बार किए गए तबादलों के संबंध में अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अब सरकार को न्यायालय के समक्ष यह स्पष्ट करना होगा कि कर्मचारी का 13 महीने में छह बार तबादला किन परिस्थितियों और प्रशासनिक कारणों से किया गया। सरकार का जवाब आने के बाद हाईकोर्ट मामले की आगे सुनवाई करेगा। इसके बाद ही यह तय होगा कि तबादला आदेशों को लेकर आगे क्या निर्णय लिया जाता है।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश से पंचायत कर्मचारी को अंतरिम राहत मिल गई है। 6 अगस्त और 17 अगस्त के दोनों तबादला आदेश अगली सुनवाई तक प्रभावी नहीं रहेंगे। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि याचिकाकर्ता ने महज 13 महीने में छह बार तबादले का दावा किया है। इसके साथ ही याचिका कोर्ट में लंबित रहने के दौरान एक और नया तबादला आदेश जारी होना भी मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अब सभी की नजर राज्य सरकार के जवाब और हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर रहेगी। सरकार की ओर से जवाब पेश होने के बाद मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।