बिलासपुर

बहुत रोया, अफसरों ने 15 साल तक भटकाया, जशपुर की अनपढ़ विधवा को आजादी से एक दिन पहले हाईकोर्ट से मिला न्याय

Bilaspur High court: पति के निधन के बाद पेंशन की अर्जी लिए जशपुर की बैगीन बाई को 15 साल बाद न्याय मिला है। हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए ​पीड़ित को 25 हजार रुपए क्षतिपूर्ति देने के निर्देश दिए..
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Bilaspur High court
बिलासपुर हाईकोर्ट (photo source- Patrika)

Chhattisgarh News: सर्विस बुक गुम होने का बहाना बनाकर विभागीय अफसरों ने अनपढ़ विधवा को पेंशन के लिए 15 तक भटकाया। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पीड़िता को मानसिक प्रताड़ना के एवज में 25 हजार रुपए का मुआवजा देने राज्य शासन को आदेश दिया है। कोर्ट ने शासन को यह छूट भी दी है कि यह राशि दोषी अधिकारियों के वेतन से वसूली जा सकती है।

Bilaspur High court: ग्रामीण सहायक के पद थे पदस्थ

जशपुर जिले के पत्थलगांव थाना क्षेत्र के ग्राम पल्लीडीह निवासी बैगीन बाई के पति शंकर साई सिदार पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग में ग्रामीण सहायक के पद पर पदस्थ थे। गंभीर बीमारी के कारण शंकर साई ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हो पा रहे थे। उन्होंने 11 सितंबर 2003 को स्वेच्छा से सेवानिवृत्ति और पेंशन भुगतान का आवेदन प्रस्तुत किया।

पति की मृत्यु के बाद लगातार आवेदन किए, लेकिन..

इससे पहले कि विभाग उनकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति पर कोई अंतिम फैसला लेता 4 जून 2007 को शंकर साई की मृत्यु हो गई। पति की मृत्यु के बाद पत्नी बैगीन बाई ने 2014 तक विभाग को लगातार आवेदन दिए। लेकिन विभाग ने रिकार्ड व सर्विस बुक गुम होने का बहाना बनाकर सालों तक पेंशन और देयकों का भुगतान नहीं किया।

कोर्ट की कड़ाई के बाद मिला भुगतान

थक-हारकर महिला ने वर्ष 2021 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की लापरवाही पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने 27 नवंबर 2025 को राज्य सरकार और मुख्य सचिव को 60 दिनों के भीतर सभी देयकों का भुगतान करने का निर्देश दिया था। मामले की सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता के व्यक्तिगत हस्तक्षेप और प्रयासों के बाद आखिरकार विभाग ने पीड़िता के सभी बकाया सेवानिवृत्ति देयकों का भुगतान कर दिया, जिसे याचिकाकर्ता के वकील ने स्वीकार किया।

Updated on:
14 Aug 2026 10:25 am
Published on:
14 Aug 2026 10:25 am