
बिलासपुर@दीपक भगत। Inspirational Story: बचपन में पोलियो ने दोनों पैरों की ताकत छीन ली। इलाज की उम्मीद में पिता ने खेत तक बेच दिया, लेकिन ऑपरेशन के बाद भी रोहिणी साहू अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो सकीं। निराशा इतनी बढ़ी कि उन्होंने खुद को कमरे तक सीमित कर लिया और जिंदगी से उम्मीद भी टूटने लगी। लेकिन यही कहानी आगे चलकर संघर्ष, हौसले और सफलता की मिसाल बन गई। व्हीलचेयर पर तलवार थामकर रोहिणी ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बनाई और अब तक 43 पदक अपने नाम कर चुकी हैं।
रोहिणी की जिंदगी में बदलाव तब आया, जब उनकी मुलाकात व्हीलचेयर फेंसिंग संघ के अध्यक्ष डीआर साहू से हुई। उन्होंने रोहिणी को व्हीलचेयर फेंसिंग से जुड़ने और तलवारबाजी में हाथ आजमाने के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में यह उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने इसे अपनी जिंदगी की नई राह बना लिया। वर्ष 2014 में व्हीलचेयर फेंसिंग की शुरुआत करने वाली रोहिणी ने देखते ही देखते राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली। लगातार अभ्यास और मेहनत के बल पर उन्होंने प्रतियोगिताओं में पदक जीतने का सिलसिला शुरू किया। आज उनकी उपलब्धियां उन लोगों के लिए प्रेरणा हैं, जो शारीरिक चुनौतियों के कारण अपने सपनों को सीमित समझने लगते हैं।
रोहिणी ने वर्ष 2014 से अब तक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 12 स्वर्ण, 10 रजत और 21 कांस्य पदक, यानी कुल 43 पदक जीते हैं। उनकी उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें वर्ष 2019-20 में गुंडाधूर अवार्ड और वर्ष 2020-21 में शहीद राजीव पांडेय अवार्ड से सम्मानित किया गया। शहीद राजीव पांडेय अवार्ड का सम्मान उन्हें वर्ष 2024 में मिला। वर्ष 2021 में इटली के पिसा में आयोजित व्हीलचेयर फेंसिंग वर्ल्ड कप में उन्होंने पांचवां स्थान हासिल किया। इसी प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन एशियन गेम्स के लिए हुआ। वर्ष 2022-23 में उनकी टीम ने मुख्यमंत्री ट्रॉफी भी अपने नाम की।
खेल के साथ रोहिणी ने पोस्ट ग्रेजुएशन और पीजीडीसीए की पढ़ाई पूरी की। वर्तमान में वह बिलासपुर के जेएसएस एनजीओ में काम कर रही हैं। परिवार का भी वह एकमात्र सहारा हैं। रोहिणी कहती हैं कि जिंदगी ने उन्हें कई बार चुनौती दी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उनका सपना खेल के क्षेत्र में और आगे बढ़ने के साथ सम्मानजनक रोजगार हासिल करना है।
संदेश: रोहिणी की कहानी बताती है कि शरीर की कोई कमी इंसान के सपनों की सीमा तय नहीं करती। अगर हौसला मजबूत हो तो व्हीलचेयर पर बैठकर भी दुनिया के बड़े खेल मंच तक पहुंचा जा सकता है।