
Railway Update: छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने रेल परिचालन को और बेहतर बनाने के लिए सिग्नलिंग व्यवस्था का आधुनिकीकरण किया है। बिलासपुर रेल मंडल के अंतर्गत हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलमार्ग पर सक्ती से खरसिया के बीच ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली शुरू कर दी गई है। इस नई व्यवस्था से रेलखंड में ट्रेनों की परिचालन क्षमता बढ़ेगी और अधिक ट्रेनों को चलाने का रास्ता आसान होगा।
रेलवे के इस बदलाव का फायदा यात्री ट्रेनों के साथ-साथ मालगाड़ियों के परिचालन में भी देखने को मिलेगा। खास बात यह है कि इस पूरे रेलखंड में 32 नए स्वचालित सिग्नल लगाए गए हैं। इसके अलावा आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और कई तकनीकी सुविधाओं को भी जोड़ा गया है। रेलवे का मानना है कि इससे ट्रेनों का संचालन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित, सुगम और समयबद्ध हो सकेगा।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर रेल मंडल ने सक्ती-झाराडीह-खरसिया सेक्शन में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली को सफलतापूर्वक शुरू कर दिया है। यह रेलखंड हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलमार्ग के बिलासपुर-झारसुगुड़ा सेक्शन का हिस्सा है। इस रेलखंड की लंबाई 16 रूट किलोमीटर है। इसमें चार लाइनें हैं, जिनकी कुल लंबाई 32 किलोमीटर दोहरी लाइन के बराबर है। इस पूरे हिस्से में नई सिग्नलिंग व्यवस्था लागू की गई है। इससे रेलवे को ट्रेनों की आवाजाही बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
इस परियोजना के तहत रेलखंड में 32 नए ऑटोमैटिक सिग्नल लगाए गए हैं। इन सभी सिग्नलों को आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली से जोड़ा गया है। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग कंप्यूटर आधारित तकनीक है। इसके माध्यम से सिग्नलों का संचालन किया जाता है। यह पारंपरिक व्यवस्था की तुलना में अधिक तेज, भरोसेमंद और सुरक्षित मानी जाती है। इससे ट्रेन के परिचालन के दौरान सिग्नलिंग व्यवस्था को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।
नई व्यवस्था में मल्टी-सेक्शन डिजिटल एक्सल काउंटर के 180 डिटेक्शन पॉइंट भी लगाए गए हैं। इनकी मदद से रेलवे ट्रैक पर ट्रेन की मौजूदगी का पता लगाया जा सकेगा। इस तकनीक से अलग-अलग हिस्सों में ट्रेनों की स्थिति की जानकारी मिलने में मदद मिलेगी। इससे सिग्नलिंग व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और परिचालन के दौरान सुरक्षा बनाए रखने में सहायता मिलेगी।
ऑटोमैटिक सिग्नलिंग प्रणाली को लगातार सक्रिय रखने के लिए रेलवे ने बिजली आपूर्ति की आधुनिक व्यवस्था भी की है। ऑटो हट में एकीकृत विद्युत आपूर्ति प्रणाली लगाई गई है, जिससे सिग्नलिंग उपकरणों को निर्बाध बिजली मिल सके। इसके अलावा आरडीएसओ के नवीनतम तकनीकी परामर्श के अनुसार आधुनिक अर्थिंग व्यवस्था की गई है।
इसका उद्देश्य उपकरणों को आकाशीय बिजली और विद्युत व्यवधानों से सुरक्षित रखना है। सिग्नलिंग और क्वाड केबलों की लगातार निगरानी के लिए अर्थ लीकेज डिटेक्टर भी लगाए गए हैं। साथ ही नई प्रणाली में डेटालॉगर, स्वचालित फ्यूज चेंजओवर और फायर अलार्म जैसी सुविधाएं भी शामिल की गई हैं। इनकी मदद से उपकरणों की निगरानी और रखरखाव आसान होगा।
ऑटोमैटिक सिग्नलिंग शुरू होने का सबसे बड़ा फायदा रेल परिचालन की क्षमता बढ़ने के रूप में सामने आएगा। नई व्यवस्था से ट्रेनों की आवाजाही को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकेगा।
इसके प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे लगातार अपने रेल नेटवर्क को आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रहा है। सक्ती-झाराडीह-खरसिया सेक्शन में ऑटोमैटिक सिग्नलिंग की शुरुआत इसी प्रयास का हिस्सा है। इससे न केवल मौजूदा रेल परिचालन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी, बल्कि भविष्य में बढ़ने वाली यातायात की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी रेलवे की क्षमता मजबूत होगी। खासकर हावड़ा-मुंबई जैसे व्यस्त रेलमार्ग पर इस तरह की आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल महत्वपूर्ण माना जा रहा है।