Sunday Guest Editor: बिलासपुर कोटा ब्लॉक के चपोरा और खुर्रा गांव की 2 महिलाओं ने अपने उद्योग को ऐसा बढ़ाया कि आज वो अन्य लोगों को रोजगार दे रही हैं।
Sunday Guest Editor:मोहन ठाकुर. छत्तीसगढ़ के बिलासपुर कोटा ब्लॉक के चपोरा और खुर्रा गांव की 2 महिलाओं ने अपने उद्योग को ऐसा बढ़ाया कि आज वो अन्य लोगों को रोजगार दे रही हैं। इसके चलते पूरे ब्लॉक में उनका नाम भी हो रहा है। चपोरा की सरिता जायसवाल कहती हैं कि महिलाओं को कभी भी कम नहीं समझना चाहिए।
संतोषी बताती हैं कि कोई भी काम असंभव नहीं होता, बस सही दिशा में बढ़ने की आवश्यकता होती है। महिलाएं घर का काम करने के साथ ही बाहर के काम को भी उतने अच्छे से संभाल लेती हैं।
संतोषी ने शारदा समूह से सहायता लेकर ईंट निर्माण इकाई की शुरुआत की। शुरुआत में संसाधनों और तकनीक की कमी से मुश्किलें जरूर आईं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आज संतोषी की ईंटभट्ठा स्थानीय निर्माण कार्यों में प्रमुख आपूर्तिकर्ता बन चुकी हैं। संतोषी कहती हैं कि इस उद्यम के लिए आत्मविश्वास बिहान योजना के कारण आया है। अब वे अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं।
महिला के अलावा पुरुषों को भी रोजगार मिल रहा है। इन महिलाओं की सफलता ने उनके गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है। छोटे-छोटे व्यवसायों के माध्यम से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर अपने परिवार का सहारा बन रही हैं। सरिता और संतोषी की तरह कई अन्य महिलाएं भी न सिर्फ अपने परिवार का सहारा बनी हैं, बल्कि गांव के विकास में भी अपना योगदान दे रही हैं।
सरिता और संतोषी ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना से जुड़कर अपना जीवन तो बदला, साथ ही कई महिलाओं के जीवन में भी परिवर्तन लाया। उन्होंने जिले की ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने की नई राह दिखाई है। योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं अब न केवल अपने पैरों पर खड़ी हो रही हैं, बल्कि दूसरों को भी रोजगार देने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।