
Fake Certificate: बिलासपुर में जाति प्रमाण पत्रों की जांच कराने व फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर हाईकोर्ट के आदेश का पालन न होने पर अवमानना याचिका दायर की गई है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को चार महीने के भीतर शिकायतों की जांच कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित विभाग के अफसर के सामने नए सिरे से अभ्यावेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
अभ्यावेदन प्राप्ति के चार महीने में पूरे मामले की जांच कर संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। याचिकाकर्ता जयश्री सिंह पुसाम ने हाईकोर्ट में उच्च स्तरीय जाति छानबीन समिति के अधिकारियों के खिलाफ न्यायधीन आदेश की अवहेलना करने का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान जानकारी दी गई कि कोर्ट के पूर्व में दिए आदेश के निराकरण के संबंध में डेडलाइन तय नहीं की गई थी।
याचिका में कहा है कि विभिन्न विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों के जाति प्रमाण पत्र की जांच कर उचित कार्यवाही करने का निर्देश हाईकोर्ट ने 17 जून 2025 को दिया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कोर्ट के आदेश के बाद भी अफसरों ने जानबूझकर कोई कदम नहीं उठाए। इससे अपात्रों को आरक्षण का लाभ मिल रहा है और वह पद पर बने हुए हैं। अवहेलना करने का आरोप लगाते हुए, अवमानना याचिका दायर की है। अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान जानकारी दी गई कि कोर्ट के पूर्व में दिए आदेश के निराकरण के संबंध में डेडलाइन तय नहीं की गई थी।
याचिकाकर्ता का कहना है, फर्जी जाति प्रमाण पत्र के सहारे राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में काम कर रहे कर्मचारियों के जाति प्रमाण पत्र की जांच कर उचित कार्यवाही करने का निर्देश अफसरों को जारी किया था, याचिकाकर्ता ने अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा,कोर्ट के आदेश के बाद भी अफसरों ने जानबूझकर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए। इससे कथित रूप से अपात्र व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित लाभ मिल रहा है और वह पद पर बने हुए हैं, इसके चलते वास्तिक अजजा के युवा वंचित हो रहे हैं। फर्जी लोग उनका हक मार रहे हैं।