World TB Day 2026: बिलासपुर जिले में टीबी (क्षय रोग) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर 2026 तक टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य तय किया गया है, वहीं दूसरी ओर बिलासपुर में 2000 से अधिक मरीज इलाजरत हैं।
World TB Day 2026: बिलासपुर जिले में टीबी (क्षय रोग) के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर 2026 तक टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य तय किया गया है, वहीं दूसरी ओर बिलासपुर में 2000 से अधिक मरीज इलाजरत हैं। जमीनी स्तर पर दवाओं की अनियमित उपलब्धता, कमजोर मॉनिटरिंग और जागरूकता की कमी इस स्थिति को और गंभीर बना रही है। टीबी उन्मूलन के प्रयासों की हकीकत दवा आपूर्ति की बाधाओं से साफ झलकती है।
वर्ष 2024-25 के दौरान कई महीनों तक मरीजों को नियमित दवाएं नहीं मिल सकीं, जिससे उपचार प्रभावित हुआ। टीबी के इलाज में दवाओं का पूरा कोर्स करना अनिवार्य होता है। बीच में रुकावट आने पर संक्रमण दोबारा उभर सकता है और अधिक खतरनाक रूप ले सकता है। चूंकि डॉट्स दवाएं सामान्य बाजार में उपलब्ध नहीं होतीं, इसलिए मरीज पूरी तरह सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं।
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शहर के चांटीडीह, चिंगराजपारा, तालापारा और बंधवापारा जैसे स्लम इलाकों में संक्रमण के सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं। गंदगी, दूषित पानी, कुपोषण और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता यहां बीमारी के प्रसार को बढ़ा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसी तरह की स्थितियां देखने को मिल रही हैं।
टीबी नियंत्रण के लिए मितानिनों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सर्वे की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन यह प्रयास प्रभावी रूप से जमीन पर नजर नहीं आते। नियमित स्क्रीनिंग और समय पर पहचान न होने से संक्रमित व्यक्ति दूसरों के लिए भी खतरा बन रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार दो से तीन सप्ताह तक खांसी, बुखार, भूख में कमी या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच जरूरी है। इसके बावजूद जागरूकता के अभाव में लोग शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का जोखिम बढ़ जाता है।
विश्व टीबी दिवस से 100 दिवसीय विशेष अभियान शुरू किया जा रहा है। इसके तहत सिम्स, जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में हाई-रिस्क मरीजों- जैसे एचआईवी, कैंसर, डायबिटीज और बीपी के मरीजों की विशेष जांच की जाएगी। स्पुटम टेस्ट और एक्स-रे के जरिए अधिक से अधिक मामलों की पहचान करने का प्रयास होगा। साथ ही हैंडहेल्ड मशीनों के जरिए गांव-गांव जाकर जांच की योजना भी बनाई गई है। फिलहाल विभाग के पास दवाओं और जांच किट की पर्याप्त उपलब्धता है। - डॉ. शुभा गरेवाल, सीएमएचओ बिलासपुर।