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Chhattisgarh Naxal News: नक्सल मामले में आरोपियों की डिफॉल्ट बेल बरकरार, 182 दिन की देरी पर हाईकोर्ट सख्त

Narayanpur Naxal Case: छत्तीसगढ़ के चर्चित नारायणपुर नक्सल मामले में आरोपियों को मिली डिफॉल्ट बेल को लेकर राज्य सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है।

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Chhattisgarh Naxal News

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला (photo source- Patrika)

Chhattisgarh Naxal News: बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें नारायणपुर के चर्चित नक्सल प्रकरण में आरोपियों को मिली डिफॉल्ट बेल को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ सरकारी प्रक्रियाओं और फाइलों के लंबित रहने का हवाला देकर देरी माफ नहीं की जा सकती। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने 182 दिन की देरी को अस्पष्टीकृत और लापरवाहीपूर्ण मानते हुए अपील को समयसीमा से बाधित बताते हुए खारिज कर दिया।

राज्य सरकार ने क्या दलील दी

राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि विधि एवं विधायी कार्य विभाग से प्रस्ताव आने, शासन की मंजूरी मिलने, दस्तावेज जुटाने और फाइल प्रक्रिया पूरी होने में समय लगा। उन्होंने कहा कि शासन एक बहुस्तरीय व्यवस्था है, जहां विभागीय औपचारिकताओं के कारण विलंब हो गया।

नक्सल-यूएपीए मामला: मिली थी डिफॉल्ट बेल

मामला नारायणपुर जिले के ओरछा थाना में दर्ज अपराध से जुड़ा है। इस केस में चंपा कर्मा, मांगी मंडावी, संकू मंडावी और लच्छू मंडावी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, आम्र्स एक्ट और गैरकानूनी गतिविधि (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) की गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। विशेष न्यायाधीश, एनआईए एक्ट एवं अनुसूचित अपराध न्यायालय, नारायणपुर ने 11 सितंबर 2025 और 24 सितंबर 2025 को आरोपियों को डिफॉल्ट बेल दे दी थी। राज्य सरकार ने इसके खिलाफ अपील दाखिल की।

कोर्ट ने कहा- सरकार को विशेष छूट नहीं

खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि कानून की समयसीमा सभी पर समान रूप से लागू होती है और सरकार को केवल फाइल प्रक्रिया या रेड टेप के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने पोस्टमास्टर जनरल बनाम लिविंग मीडिया इंडिया लिमिटेड और स्टेट ऑफ मध्यप्रदेश बनाम रामकुमार चौधरी मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि देरी माफी अपवाद है, अधिकार नहीं। यदि पर्याप्त और ठोस कारण नहीं बताए जाएं, तो देरी को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

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