
Bollywood Movies on Extramarital affairs: भारतीय समाज में शादी को हमेशा पवित्र और अटूट बंधन माना गया है, लेकिन समय के साथ कई बार रिश्तों की परिभाषाएं बदलती हुई नजर आती हैं। इन्हीं बदलते सामाजिक सच को बॉलीवुड ने कई बार अपने सिनेमा में जगह दी है। खासतौर पर विवाहेतर संबंध जैसे संवेदनशील विषय पर बनी कुछ फिल्में न सिर्फ चर्चा में रहीं, बल्कि समाज को आईना भी दिखाती नजर आईं। ऐसे में नजर डालते हैं उन बॉलीवुड फिल्मों पर, जिन्होंने अवैध रिश्तों को कहानी का केंद्र बनाया।
1981 में रिलीज हुई यश चोपड़ा निर्देशित फिल्म ‘सिलसिला’ को आज भी क्लासिक माना जाता है। फिल्म में जया बच्चन, अमिताभ बच्चन, रेखा और संजीव कुमार नजर आए थे। कहानी ऐसे रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां भावनाएं सामाजिक मर्यादाओं से टकराती हैं। बिना शोर मचाए ये फिल्म विवाहेतर प्रेम की जटिलताओं को बेहद संजीदगी से दिखाती है।
1985 में आई फिल्म ‘आखिर क्यों?’ ने शादी और भरोसे के मायने पर सवाल खड़े किए। स्मिता पाटिल, राकेश रोशन और टीना अंबानी की अदाकारी से सजी ये फिल्म दिखाती है कि कैसे एक गलत रिश्ता पूरे परिवार की नींव हिला सकता है। निर्देशक जे. ओम प्रकाश ने इसे भावनात्मक गहराई के साथ पेश किया।
2004 में रिलीज हुई ‘मर्डर’ ने विवाहेतर संबंधों को थ्रिल और बोल्डनेस के साथ दिखाया। इमरान हाशमी और मल्लिका शेरावत की ये फिल्म बताती है कि जब अवैध रिश्ते हद पार कर जाएं, तो अंजाम कितना खतरनाक हो सकता है। ये फिल्म अपने समय में काफी विवादों में रही, लेकिन सुपरहिट साबित हुई।
करण जौहर की 2006 में आई फिल्म ‘कभी अलविदा न कहना’ शायद इस विषय पर बनी सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है। शाहरुख खान और रानी मुखर्जी के किरदार शादीशुदा होते हुए भी एक-दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं। ये फिल्म दिखाती है कि सिर्फ शादी में होना, भावनात्मक जुड़ाव की गारंटी नहीं होता।
2016 में आई ‘अजहर’ पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन की जिंदगी से प्रेरित थी। फिल्म में दिखाया गया कि कैसे उनका निजी जीवन, खासतौर पर विवाहेतर संबंध, उनके करियर और छवि पर असर डालता है। इमरान हाशमी की इस फिल्म ने रिश्तों में होने वाली दगाबाजी को समाज के सामने रखा। इसी फिल्म में दिखाया जाता है कि पत्नी के रहते हुए पति प्रेमिका संग अवैध संबंध बनाता है।