
Geeta Kapoor on Intimacy: डांस की दुनिया में दशकों से अपनी अलग पहचान बना चुकीं मशहूर कोरियोग्राफर गीता कपूर हाल ही में अपने एक बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। अपनी पर्सनल लाइफ पर कम बात करने वालीं गीता कपूर ने इंटिमेसी और अपने रिलेशनशिप स्टेटस को लेकर खुलकर अपनी राय रखी है। 'गीता मां' के नाम से पुकारे जाने वालीं गीता कपूर ने समाज की उस सोच पर सवाल उठाए हैं जो किसी महिला को उसकी उम्र, छवि या उपाधि के दायरे में बांधकर देखना चाहती है।
गीता कपूर का कहना है कि किसी को 'मां' कह देने से यह मान लेना गलत है कि उस इंसान की निजी इच्छाएं, भावनाएं या रिश्ते नहीं हो सकते। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वह किसी साध्वी या त्याग की मूर्ति नहीं हैं, बल्कि एक सामान्य महिला हैं, जो जिंदगी को अपने तरीके से जीती हैं। गीता ने कहा, 'मैं कोई नन नहीं हूं, मैं कुंवारी नहीं हूं। मैं अपने मोमेंट्स तलाश लेती हूं, मैं लोगों से मिलती हूं, डेट करती हूं, किसी के साथ इंटिमेट भी होती हूं।'
'हिंदी रश' से बात करते हुए कोरियोग्राफर ने यह भी कहा कि समाज अक्सर महिलाओं से ये उम्मीद करता है कि वो एक तय किए हुए फ्रेम में फिट हों। खासकर जब किसी महिला को सम्मान के तौर पर 'मां' जैसी उपाधि दे दी जाती है, तो उससे जुड़ी मानवीय इच्छाओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है। गीता कपूर का सवाल है कि आखिर ऐसा क्यों माना जाता है कि एक उम्र के बाद या एक पहचान के साथ महिला की निजी जिंदगी खत्म हो जाती है।
गीता कपूर ने आगे बात करते हुए ये भी कहा, 'फीलिंग्स हर किसी की होती है। मैं अपनी जिंदगी में खुश हूं। मैं फिजिकली सैटिस्फाइड हूं और मैं आज भी अपने बयान पर कायम हूं क्योंकि आपको लगता है कि मुझे ये नहीं बोलना चाहिए था, तो मैं कहती हूं अगर किया भी तो क्या हुआ? क्या आप नहीं करते, कोई और नहीं करता।'
52 साल की उम्र में भी गीता कपूर खुद को आत्मनिर्भर, आत्म-जागरूक और भावनात्मक रूप से संतुलित मानती हैं। वह खुलकर कहती हैं कि शादी न करने का मतलब यह नहीं कि इंसान अकेला या अधूरा है। रिश्ते, भावनाएं और नजदीकियां जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हैं और इन्हें लेकर शर्म या चुप्पी की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए।
गीता ने ये भी साफ किया कि उनका बयान किसी विवाद को जन्म देने के लिए नहीं था। वह सिर्फ यह समझाना चाहती थीं कि समाज क्यों यह तय कर लेता है कि कोई महिला क्या कर सकती है और क्या नहीं। उनका मानना है कि जो बातें आम लोगों के लिए सामान्य हैं, वही जब किसी जानी-मानी शख्सियत से जुड़ती हैं तो अचानक टैबू बना दी जाती हैं।
अपने गुस्से और नाराजगी को जाहिर करते हुए गीता कपूर ने कहा कि लोग अक्सर वही सुनना चाहते हैं जो उनकी सोच से मेल खाता हो। अगर कोई महिला अपनी सच्चाई खुलकर रख दे, तो उसे जज किया जाने लगता है। गीता का मानना है कि यह सोच बदलने की जरूरत है, क्योंकि सम्मान और स्वतंत्रता साथ-साथ चल सकते हैं।