
Vidyut Jammwal On Tiger Shroff Attack: बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता विद्युत जामवाल (Vidyut Jammwal) अपने बेबाक अंदाज और फिटनेस के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में मुंबई के जुहू इलाके में एक्टर टाइगर श्रॉफ की कार पर हुई ताबड़तोड़ फायरिंग की घटना ने पूरे फिल्म जगत को हिला कर रख दिया है। इस सनसनीखेज घटना के बाद विद्युत जामवाल ने एक ऐसा कमेंट किया था, उन्होंने कहा था कि घटना के वक्त किसी ने हमलावरों का पीछा क्यों नहीं किया था?"। उसी पर अब कंटेंट क्रिएटर प्रेरणा भारद्वाज ने सवाल उठाए हैं और इसका जबरदस्त जवाब दिया है। जिसके बाद अभिनेता ने भी कमेंट किया।
टाइगर श्रॉफ पर हुई फायरिंग की 'घटना के तुरंत बाद 'विद्युत जामवाल ने एक वीडियो शेयर किया था, जिसमें उन्होंने टाइगर श्रॉफ को अपना एक बहादुर दोस्त बताया था। लेकिन, उनका मुख्य सवाल यह था कि जब जुहू में सरेआम फायरिंग हो रही थी, तब वहां मौजूद लोगों या टाइगर के फैंस ने हमलावरों को पकड़ने की कोशिश क्यों नहीं की?
विद्युत ने कहा था कि ऐसी मुश्किल घड़ी में किसी को आगे आकर बदमाशों का पीछा करना चाहिए था। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया, जिसमें कई लोगों ने तर्क दिया कि आम नागरिकों से ऐसे जोखिम भरे कदम की उम्मीद करना सही नहीं है।
कंटेंट क्रिएटर प्रेरणा भारद्वाज ने विद्युत के इस बयान पर एक वीडियो जारी कर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले की कड़ी निंदा की, इसके साथ ही यह भी सवाल उठाया कि जब किसी के सामने हथियारबंद हमलावर आ जाए, तो उससे अपनी जान जोखिम में डालने की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
प्रेरणा का कहना था कि गोलीबारी जैसी डरावनी और जानलेवा स्थिति में किसी भी अनट्रेंड नागरिक का पहला नेचुरल रिएक्शन (Survival Instinct) वहां से भागने या छिपने का होता है, न कि सामने वाले से भिड़ने का। ऐसे समय में खुद को असहाय महसूस करना पूरी तरह स्वाभाविक है।
प्रेरणा के इस तार्किक जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए विद्युत जामवाल ने उनके वीडियो के लिए शुक्रिया अदा किया। विद्युत ने साफ किया कि उनका उद्देश्य किसी आम इंसान की जान जोखिम में डालना नहीं था, बल्कि उनका इशारा उस सामाजिक प्रवृत्ति की तरफ था जहां लोग किसी अपराध या अन्याय (जैसे छेड़छाड़, चोरी या सड़क पर होने वाली हिंसा) को होते हुए देखते हैं, लेकिन सिर्फ मूर्ति बनकर खड़े रहते हैं।
विद्युत ने लिखा कि इसके लिए किसी मार्शल आर्ट्स ट्रेनिंग की नहीं, बल्कि 'एम्पथेटिक करेज' यानी सहानुभूतिपूर्ण साहस की जरूरत होती है। आखिर में प्रेरणा ने भी विद्युत के विचारों का सम्मान करते हुए साफ किया कि उनका मकसद केवल मदद करने और हथियारबंद अपराधी से सीधे मुकाबला करने के बीच के बारीक अंतर को समझाना था। इस पूरी बहस ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आपातकालीन स्थितियों में जनता की सुरक्षा और नैतिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।