
Dia Mirza On Campaign: महाराष्ट्र में पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अभिनेत्री दीया मिर्जा ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा था कि महाराष्ट्र के पटाखा-विरोधी अभियान के लिए किसी सेलिब्रिटी को सरकारी पैसे देकर शामिल न किया जाए। अदालत ने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि चर्चित हस्तियां समाज के लिए अपना योगदान दें।
इस मामले पर दीया मिर्जा ने कहा है कि उन्होंने कभी भी किसी सार्वजनिक सेवा अभियान के लिए पैसे नहीं लिए हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि किन लोगों को इस तरह के अभियानों के लिए भारी रकम दी गई है।
दीया मिर्जा ने इस मुद्दे पर कहा, 'मैंने कभी किसी पब्लिक सर्विस कैंपेन के लिए कोई पैसा चार्ज नहीं किया है। मुझे नहीं पता कि किसे भारी रकम दी गई है।'
अभिनेत्री ने ये भी साफ किया कि उनके मुताबिक सेलिब्रिटीज सरकार और सिविल सोसायटी के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं, खासकर तब जब किसी गंभीर और हल की जा सकने वाली समस्या पर ध्यान देने की जरूरत हो।
दीया लंबे समय से पर्यावरण और वायु प्रदूषण से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि वह एक दशक से भी ज्यादा समय से लोगों का ध्यान वायु गुणवत्ता की ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं।
दीया मिर्जा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट का जिक्र करते हुए कहा कि वह लगातार वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI को लेकर अपडेट साझा करती हैं। उनके मुताबिक, यह सिर्फ किसी एक अभियान तक सीमित प्रयास नहीं है, बल्कि प्रदूषण और उससे जुड़े संभावित समाधानों की ओर लोगों का ध्यान खींचने की लगातार कोशिश है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम यानी UNEP का भी जिक्र किया। दीया के मुताबिक, UNEP ने वायु प्रदूषण से निपटने के प्रयासों को बढ़ावा देने और उन्हें समर्थन देने के लिए रणनीतिक स्तर पर काम किया है और वह भी इससे जुड़े प्रयासों का हिस्सा रही हैं।
दीया मिर्जा ने पर्यावरण से जुड़े अभियानों के सामने आने वाली एक बड़ी चुनौती के तौर पर सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि सरकारी एजेंसियां एक-दूसरे के साथ मिलकर काम नहीं करतीं।
उनका कहना है कि प्रदूषण जैसी समस्या से निपटने के लिए सिर्फ लोगों को जागरूक करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि अलग-अलग सरकारी विभागों और एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल भी जरूरी है।
यह पूरा मामला बॉम्बे हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद चर्चा में आया। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार के प्रस्तावित पटाखा-विरोधी अभियान को लेकर नाराजगी जताई थी। अदालत के मुताबिक, अगर सेलिब्रिटीज समाज के बीच प्रभाव रखते हैं तो उन्हें ऐसे मुद्दों पर आगे आकर योगदान देना चाहिए।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को यह भी स्पष्ट किया कि अभियान के लिए किसी सेलिब्रिटी को बड़ी रकम देकर शामिल करने के बजाय सार्वजनिक धन का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाए।
दीया मिर्जा के बयान के बाद यह बहस एक बार फिर सामने आ गई है कि पर्यावरण और प्रदूषण जैसे सार्वजनिक मुद्दों पर सेलिब्रिटीज की भूमिका क्या होनी चाहिए। अभिनेत्री ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि वह लंबे समय से बिना किसी भुगतान के ऐसे मुद्दों को उठाती रही हैं और सरकार तथा नागरिक संगठनों के साथ मिलकर काम करने की इच्छुक हैं।