
Satluj Movie OTT Controversy: पंजाबी सुपरस्टार दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' रिलीज के महज दो दिन बाद ही ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 से हटा दी गई। फिल्म हटते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और कई लोगों ने सवाल उठाए कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि रिलीज के तुरंत बाद फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटाना पड़ा।
अब इस पूरे मामले पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) ने अपना पक्ष रखा है। मंत्रालय ने साफ किया है कि फिल्म को जरूरी प्रमाणन प्रक्रिया पूरी किए बिना ओटीटी पर रिलीज किया गया था। वहीं, फिल्म हटने के बाद दिलजीत दोसांझ ने भी पहली बार इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया दी है।
'सतलुज' मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म है। हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ के अलावा अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहल्यान जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म रिलीज होते ही चर्चा में आ गई, लेकिन दो दिन बाद इसे ZEE5 से हटा दिया गया।
फिल्म हटने के बाद कई राजनीतिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी। इसी बीच मामला केंद्र सरकार तक पहुंचा और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने भी आधिकारिक तौर पर अपनी स्थिति स्पष्ट की।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, 'सतलुज' के पास रिलीज के लिए आवश्यक प्रमाणन नहीं था। मंत्रालय का कहना है कि फिल्म निर्माताओं ने निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बजाय फिल्म का शीर्षक बदलकर सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया।
अधिकारियों ने ये भी दावा किया कि प्रमाणन प्रक्रिया के दौरान फिल्म में लगभग 100 कट लगाने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, इन बदलावों को लागू कराने के बजाय निर्माताओं ने कथित तौर पर फिल्म का नया शीर्षक अपनाया और उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज कर दिया।
मंत्रालय के अनुसार, फिल्म रिलीज से पहले निर्माताओं की ओर से न तो पुनर्विचार के लिए आवेदन किया गया और न ही अंतिम मंजूरी लेने की प्रक्रिया पूरी की गई। यही वजह रही कि फिल्म को लेकर कार्रवाई की गई।
मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि फिल्म की रिलीज सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 की भावना के अनुरूप नहीं थी। उनका मानना है कि किसी भी फिल्म को रिलीज करने से पहले आवश्यक नियामकीय प्रक्रियाओं का पालन किया जाना जरूरी है।
हालांकि, मंत्रालय ने सार्वजनिक बयान में किसी विशेष कानूनी धारा का विस्तृत उल्लेख नहीं किया, लेकिन यह जरूर कहा कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
फिल्म हटाए जाने के बाद ZEE5 ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए 'सतलुज' भारत में अगले आदेश तक उपलब्ध नहीं रहेगी।
प्लेटफॉर्म ने यह भी भरोसा दिलाया कि वह सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद फिल्म को दोबारा दर्शकों तक पहुंचाने के लिए संबंधित पक्षों के साथ काम करेगा।
फिल्म हटने के बाद दिलजीत दोसांझ इंस्टाग्राम लाइव पर आए और पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले से ही अंदेशा था कि फिल्म के साथ ऐसा हो सकता है।
दिलजीत ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि सोमवार को दफ्तर खुलने के बाद कार्रवाई हो सकती है, लेकिन यह फैसला रविवार शाम को ही हो गया। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उन्हें इस बात की खुशी है कि रिलीज के बाद बड़ी संख्या में दर्शकों ने फिल्म देख ली। एक्टर ने यह भी कहा कि उन्हें संतोष है कि फिल्म अपने उद्देश्य के साथ लोगों तक पहुंची और दर्शकों ने इसे पसंद किया।
'सतलुज' प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष पर आधारित फिल्म है। खालड़ा 1995 में रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए थे और उनका मामला लंबे समय तक राष्ट्रीय चर्चा का विषय रहा। फिल्म उनके जीवन, संघर्ष और मानवाधिकारों के लिए किए गए कार्यों को पर्दे पर दिखाने का प्रयास करती है।
फिल्म के ओटीटी से हटने के बाद अब सभी की नजर इस बात पर है कि आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इसे दोबारा रिलीज किया जाएगा या नहीं।