सिंगर जावेद अली ने राजस्थान पत्रिका के पेट्रनशिप में आयोजित तीन दिवसीय रेमंड एमटीवी इंडिया म्यूजिक समिट के दौरान पत्रिका से खास बातचीत की।
बॉलीवुड के मशहूर सिंगर जावेद अली ने राजस्थान पत्रिका के पेट्रनशिप में आयोजित तीन दिवसीय रेमंड एमटीवी इंडिया म्यूजिक समिट के दूसरे दिन देर रात सेशन 'इश्क विश्क' में अपनी परफॉर्मेंस से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। देरा रात भी श्रोताओं में उनको सुनने का उत्साह देखते ही बन रहा था। अपनी परफॉर्मेंस से पहले जावेद अली ने पत्रिका से खास बातचीत की।
सच्चा सुर इमान की बात
जावेद अली ने कहा, 'सच्चा सुर एक इमान की बात होती है और जो सच्चे सुर को प्यार नहीं करता वह बेईमान है। मुझे नहीं लगता कि कोई भी शख्स ऐसा होगा जो सच्चे सुर को प्यार नहीं करता होगा। अगर सच्चा सुर नहीं है जो चीज हमें म्यूजिक में तलाशनी चाहिए, वो कभी नहीं मिलेगी।'
बच्चों में क्लासिकल की चिंगारी लगाना जरूरी
जावेद अली ने आगे कहा, 'सिंगिंग का बेसिक क्लासिकल होना बहुत जरूरी है। यह उनकी गायिकी की नींव को मजबूत करता है। मैं आजकल देख रहा हूं और कई रियलिटी शोज में भी देखा है कि आजकल बच्चे अपनी सिंगिंग की ट्रेनिंग क्लासिकल से शुरू कर रहे हैं लेकिन उसमें क्लासिकल के प्रति लत लगाना और इसकी चिंगारी जगाना बहुत जरूरी है, ताकि उनमें क्लासिकल को सीखने का शौक और जुनून पैदा हो।'
बेसिक क्लासिकल से हर तरह की गायिकी मुमकिन
जावेद ने कहा,'आजकल के बच्चे वेर्स्टन म्यूजिक करना चाहते हैं। लेकिन इसके लिए बेसिक क्लासिकल सीखना बहुत जरूरी है। अगर ऐसा नहीं होगा तो वे उस मुकाम तक नहीं पहुंच पाएंगे, जहां वे जाना चाहते हैं। इसके साथ ही अगर आपको बेसिक क्लासिकल आता है तो आप वेर्स्टन, हिप हॉप, पॉप किसी भी तरह की सिंगिंग कर सकते हैं।
राग बेस्ड वेब सीरीज में गाए गाने
जावेद अली से जब पूछा गया कि वेब सीरीज में गाने कम ही सुनने को मिलते हैं तो इस पर उन्होंने कहा, अब वेब सीरीज में गानों का चलन शुरू हो गया है। मैंने भी अभी कुछ वेब सीरीज में गाने गाए हैं। अभी मैंने एक वेब सीरीज की है, जो राग बेस्ड है। इसका नाम है 'बंदिश बेंडिट'। इसमें मैनें शंकर महादेवन के लिए गाया है और मुझे खुशी है कि इसमें मैंने पूरा क्लासिकल गाया है।
उस्ताद गुलाम अली की वजह बदला नाम
जावेद अली ने बताया कि उनका असली नाम जावेद हुसैन है। उन्होंने कहा, 'मैं उस्ताद गुलाम अली का बचपन से ही बहुत बड़ा फैन हूं। मैंने सोचा की उनका नाम गुलाम अली है और मेरा जावेद हुसैन, अगर मेरा नाम भी जावेद अली हो तो। मैंने अपने वालिद से इस बारे में बात की। उन्होंने मुझे कहा कि उस्ताद आपको जिंदगी की राह दिखाता। वो आपको काबिल बनाता है। इसके बाद पिता की रजामंदी लेकर मैंने मेरा नाम जावेद अली रखा।