Gul Panag Slams Dhruv Rathee Over Remarks On PM Modi: देश के पीएम नरेंद्र मोदी का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है, क्योंकि वे देश के विकास और जनता के कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं। हाल ही में पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बाद ध्रुव राठी सोशल मीडिया पर घिर गए।
Gul Panag Slams Dhruv Rathee Over Remarks On PM Modi: बॉलीवुड एक्ट्रेस और पूर्व राजनेता गुल पनाग इन दिनों एक ऑनलाइन बहस से चर्चा में हैं। उन्होंने यूट्यूबर और पॉलिटिकल कमेंटेटर ध्रुव राठी के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी जिसमें राठी ने विदेशी पत्रकारों को पीएम नरेंद्र मोदी से सवाल पूछकर उन्हें "शर्मिंदा" करने के लिए प्रेरित किया था।
ये पूरा विवाद PM मोदी के नॉर्वे दौरे से जुड़ा है। ओस्लो में नॉर्वे के PM Jonas Gahr Store के साथ एक संयुक्त मीडिया अपीयरेंस के दौरान नॉर्वेजियन पत्रकार हेले लिंग ने PM मोदी से सवाल पूछने की कोशिश की। जैसे ही मोदी पोडियम से जाने लगे, पत्रकार ने पूछा कि वो दुनिया के सबसे आजाद प्रेस से सवाल क्यों नहीं लेते। बता दें, PM मोदी ने सवाल का जवाब नहीं दिया और कमरे से बाहर चले गए।
इसके बाद पत्रकार ने X पर ये वीडियो पोस्ट किया और भारत की प्रेस स्वतंत्रता रैंकिंग का हवाला देते हुए कहा कि वो उनसे सवाल का जवाब मिलने की उम्मीद नहीं कर रही थीं। इससे पहले 19 मई को ध्रुव राठी ने X पर PM मोदी की आलोचना करते हुए लिखा कि उन्होंने 12 साल के कार्यकाल में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की और वो जवाबदेही की बुनियादी जरूरतें पूरी करने में नाकाम रहे। इससे भी आगे जाते हुए उन्होंने दूसरे यूरोपीय देशों के पत्रकारों से अपील की कि वे जहां भी मोदी को देखें उनसे सवाल पूछें और उन्हें "इतना शर्मिंदा करें" कि उन्हें जवाबदेही दिखानी पड़े।
इसके बाद आज 22 मई को गुल पनाग ने राठी के इस बयान पर असहमति जताते हुए कहा कि किसी सरकार से असहमत होना, विरोध करना और अलग वोट देना ये सब लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री के पद को, उस व्यक्ति को और वो विदेश में जिसका प्रतिनिधित्व करते हैं उसे विदेशी धरती पर मजाक बनाना, ये सही सही नहीं है। गुल ने आगे ये भी कहा कि इस तरह का रवैया PM को, उस संस्था को और हमें यानी भारत को ही कमजोर करता है, हम सबको देश के PM का सम्मान करना सीखना चाहिए।
इतना ही नहीं, गुल पनाग और ध्रुव राठी की इस नोंकझोंक पर सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया। एक तरफ वे लोग थे जो राठी के रुख का सपोर्ट कर रहे थे और PM की जवाबदेही की मांग को सही बता रहे थे। दूसरी ओर गुल पनाग के विचारों से सहमत लोग थे जो मानते थे कि राष्ट्रीय प्रतिष्ठा की एक सीमा होती है।