
Shobhinaw Sayta On Hanuman Ansh Box Office: बॉलीवुड में कई कलाकार ऐसे हैं जिन्हें एक फिल्म अचानक पहचान दिला देती है। लेकिन लोकप्रियता मिलने के बाद कोई कलाकार अपनी निजी जिंदगी को और ज्यादा लोगों से साझा करने के बजाय खुद को रहस्यमयी बनाए रखना चाहे, तो ये बात जरूर ध्यान खींचती है। फिल्म 'हनुमान अंश' से चर्चा में आए अभिनेता शोभिनव सत्या का भी कुछ ऐसा ही अंदाज है। 31 साल के शोभिनव ने फिल्म में आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा का किरदार निभाया और देखते ही देखते दर्शकों के बीच पहचान बना ली।
फिल्म की सफलता के बाद शोभिनव के सोशल मीडिया फॉलोअर्स में जबरदस्त इजाफा हुआ है। हालांकि अभिनेता का कहना है कि वो अपनी निजी जिंदगी को लोगों के सामने ज्यादा खोलना नहीं चाहते। उनके लिए कैमरे के सामने दिखना और असल जिंदगी को निजी रखना दो अलग चीजें हैं।
'एचटी सिटी' से बात करते हुए शोभिनव बताते हैं कि फिल्म का टीजर आने से पहले सोशल मीडिया पर उनकी मौजूदगी बेहद सीमित थी। वह फोन से भी लंबे समय तक दूर रहना पसंद करते हैं। उनके मुताबिक, प्रसिद्धि उनके जीवन जीने के तरीके या काम चुनने के सिद्धांतों को नहीं बदलेगी।
शोभिनव ने दिग्गज अभिनेता अमरीश पुरी को अपना प्रेरणास्रोत बताया। उन्हें अमरीश पुरी की यह बात पसंद है कि उन्होंने अपनी वास्तविक जिंदगी को पर्दे की लोकप्रियता से अलग रखा और अपनी पहचान को मुख्य रूप से अभिनय के जरिए सामने आने दिया।
इसी सोच के साथ शोभिनव अपनी जिंदगी को भी सीमित दायरे में रखना चाहते हैं। उनका कहना है कि वह आगे भी उसी राह पर चलना चाहेंगे, जिसे वह हनुमानजी का मार्गदर्शन मानते हैं।
हनुमान अंश में शोभिनव की कास्टिंग भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रही। वह फिल्म इंडस्ट्री में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम कर रहे थे। करीब एक दशक पहले एफटीआईआई, पुणे की एक छात्र फिल्म में मुख्य कलाकार के उपलब्ध न होने पर उन्हें अभिनय करने का मौका मिला था।
यही अनुभव उनके लिए एक तरह से अभिनय की शुरुआत बना। इसके बाद उन्होंने तय किया कि उन्हें छोटे-मोटे किरदारों तक सीमित नहीं रहना है। लंबे संघर्ष के बाद उन्हें हनुमान अंश में नीम करोली बाबा का किरदार मिला और इस भूमिका ने उन्हें दर्शकों के बीच पहचान दिला दी।
शोभिनव का कहना है कि वह भविष्य में अलग-अलग तरह के किरदार जरूर आजमाना चाहते हैं, लेकिन अपनी कुछ सीमाओं से समझौता नहीं करेंगे। वह ऐसे किरदारों से दूरी रखना चाहते हैं जिनमें गाली-गलौज या अत्यधिक हिंसा उनकी व्यक्तिगत सोच के बिल्कुल विपरीत हो।
अभिनेता खुद को सात्विक जीवनशैली के करीब बताते हैं और उनका मानना है कि जिस चीज को वह निजी जीवन में स्वीकार नहीं करते, उसे पर्दे पर निभाना उनके लिए मुश्किल होगा। उनका फोकस फिलहाल अपनी फिल्म और नीम करोली बाबा की शिक्षाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर है।
फिल्म के बाद कुछ लोग शोभिनव को बाबा के किरदार से जोड़कर देखते हैं और उनके पैर छूने की कोशिश करते हैं। अभिनेता इससे असहज महसूस करते हैं। उनका कहना है कि वह खुद को केवल बाबा का सेवक मानते हैं और लोगों को उनके बजाय नीम करोली बाबा की प्रतिमा के चरण स्पर्श करने की सलाह देते हैं।
शोभिनव का बाबा से जुड़ाव भी काफी पुराना बताया जाता है। स्कूल के दिनों में एक दोस्त के जरिए उन्हें बाबा की कहानी के बारे में जानने का मौका मिला था। तभी से उनके मन में उनके प्रति आस्था और सम्मान बढ़ता गया।
शोभिनव का जन्म उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के खैराबाद में हुआ। पिता की नौकरी के कारण बाद में उनका परिवार लखनऊ आ गया, जहां उन्होंने पढ़ाई की। उच्च शिक्षा के साथ उन्होंने अभिनय की ट्रेनिंग भी ली और एफटीआईआई से छोटा कोर्स किया।
आज हनुमान अंश की सफलता ने उन्हें अचानक सुर्खियों में ला दिया है, लेकिन शोभिनव की प्राथमिकता फिलहाल स्टारडम नहीं बल्कि अपने काम और सिद्धांतों को बनाए रखना है। वह मानते हैं कि लोकप्रियता आए या जाए, कलाकार के लिए उसकी अपनी मर्यादा और पहचान सबसे जरूरी होनी चाहिए।