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‘कितने दिन कोई उधार देगा, राशन खरीदने के लिए…’ हर्षा रिछारिया का छलका दर्द, सामने आया वीडियो

Harsha Richhariya Controversy: हर्षा रिछारिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं। कभी मॉडलिंग और ग्लैमर की दुनिया छोड़कर साध्वी बनीं, और अब फिर से वहीं लौटने का फैसला कर चुकी हैं। हाल ही में सामने आए एक वीडियो में हर्षा का दर्द छलक उठा, जिसमें उन्होंने बिना नाम लिए साधु-संतों पर निशाना साधते हुए कहा […]

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Jan 21, 2026
हर्षा रिछारिया का छलका दर्द (इमेज सोर्स: एक्स)

Harsha Richhariya Controversy: हर्षा रिछारिया एक बार फिर सुर्खियों में हैं। कभी मॉडलिंग और ग्लैमर की दुनिया छोड़कर साध्वी बनीं, और अब फिर से वहीं लौटने का फैसला कर चुकी हैं। हाल ही में सामने आए एक वीडियो में हर्षा का दर्द छलक उठा, जिसमें उन्होंने बिना नाम लिए साधु-संतों पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘गद्दी पर बैठे कुछ लोग नहीं चाहते कि मैं आगे बढूं।’

हर्षा का दावा है कि धर्म की राह अपनाने के बाद से ही उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है और यही कारण है कि वह अब फिर से अपने पुराने करियर की ओर लौट रही हैं।

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हर्षा रिछारिया ने तोड़ी चुप्पी; साधा निशाना

हर्षा रिछारिया ने साधु-संतों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ गद्दी पर बैठे लोग उन्हें आगे बढ़ने ही नहीं देना चाहते। उनका कहना है कि जब भी वह समाज या युवाओं के लिए कुछ करने की कोशिश करती हैं, तो वही लोग रुकावटें खड़ी कर देते हैं। हर्षा के मुताबिक, ये लोग लगातार उन्हें परेशान करने की कोशिश कर रहे हैं और चाहते हैं कि वह किसी भी कीमत पर आगे न बढ़ें।

ग्लैमर की दुनिया में वापसी के फैसले पर हर्षा ने बताया कि उन्होंने साध्वी बनने के लिए अपने सारे काम छोड़ दिए थे, लेकिन बाद में एहसास हुआ कि वह पूरी तरह दान या भेंट पर निर्भर होकर नहीं जी सकतीं। उन्होंने कहा कि धर्म का प्रचार तभी सही होता है जब इंसान के पास खुद के लिए भी पर्याप्त साधन हों।

कौन कितने दिन उधार देगा?

“अगर राशन ही खरीदना है तो पैसे चाहिए… कौन कितने दिन उधार देगा?”, यह कहते हुए उन्होंने बताया कि उनके फैसलों और चरित्र पर तक सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि किसी तरह का सपोर्ट भी नहीं मिलता। नाम न लेते हुए हर्षा ने कहा कि कुछ लोग लगातार ऐसा माहौल बनाते हैं जिससे वह असहज महसूस करें। बार-बार बाधाएं डालना और उनके कामों को रोकना गलत सोच है।

धर्म छोड़ने की बात पर हर्षा ने साफ किया कि उन्होंने सनातन धर्म नहीं छोड़ा, बल्कि सिर्फ अपने धार्मिक कार्यक्रमों को रोकने का फैसला किया था। उनका कहना है कि महाकुंभ के बाद वह युवाओं और बेटियों के लिए काम करना चाहती थीं, लेकिन कुछ लोग उनकी राह में रुकावट बन रहे हैं।

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