Indian film BAFTA 2026 nominations: ग्लोबल मंच पर नॉर्थ-ईस्ट का जलवा लगातार बढ़ता जा रहा है और हाल ही में फरहान अख्तर की फिल्म ने इस क्षेत्र की पहचान को नया मुकाम दिया है।
Indian film BAFTA 2026 nominations: भारतीय सिनेमा के लिए एक बेहद गर्व का क्षण सामने आया है, जिसमें इंटरनेशनल अवॉर्ड्स 'द ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स' (BAFTA) 2026 के नॉमिनेशन्स की घोषणा हो चुकी है और इसमें एक छोटी-सी मणिपुरी फिल्म 'बूंग' (Boong) ने अपनी जगह बनाकर दुनिया भर में खूब सुर्खियां बटोरी है। बता दें, इस फिल्म की सबसे बड़ी और खास बात ये है कि इसे बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और फिल्म निर्माता फरहान अख्तर ने प्रोड्यूस किया है , तो आइए जानते हैं इस फिल्म और इसकी उपलब्धि के बारे में…
मणिपुरी फिल्म 'बूंग' को बाफ्टा 2026 की 'बेस्ट चिल्ड्रन एंड फैमिली फिल्म' (Best Children & Family Film) कैटेगरी में नामांकित किया गया है। इस प्रतिष्ठित सूची में 'बूंग' का मुकाबला 'आर्को', 'लिलो एंड स्टिच' और 'जूट्रोपोलिस' जैसी बड़ी इंटरनेशनल फिल्मों के साथ होगा। ये फिल्म मणिपुर की खूबसूरत पहाड़ियों में रहने वाले एक मासूम लड़के 'ब्रोजेंड्रो' की कहानी है, जिसे प्यार से सब 'बूंग' कहते हैं।
फिल्म में दिखाया गया है कि बूंग अपनी मां को एक खास सरप्राइज गिफ्ट देना चाहता है और उसे लगता है कि अगर वो अपने बरसों पहले बिछड़ चुके पिता को घर वापस ले आए, तो ये उसकी मां के लिए दुनिया का सबसे बड़ा तोहफा होगा। इतना ही नहीं, इसी उम्मीद के साथ वो अपने पिता की तलाश में एक सफर पर निकल पड़ता है, जहां उसे जीवन के कई नए अनुभवों और सरप्राइजेस का सामना करना पड़ता है।
फिल्म का निर्देशन लक्ष्मीप्रिया देवी ने किया है और इसका निर्माण फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी की कंपनी 'एक्सेल एंटरटेनमेंट' के बैनर तले हुआ है। साथ ही, फिल्म में लीड रोल में नन्हे कलाकार गुगुन किपगेन ने निभाई है, जिन्होंने 'बूंग' के किरदार में अपनी मासूमियत से सबका दिल जीत लिया। उनके साथ बाला हिजाम, विक्रम कोचर और थौदम ब्रजबिधु जैसे स्टार्स ने भी लीड रोल वाली भूमिका निभाई हैं।
बता दें, 'बूंग' का सफर बाफ्टा से पहले ही काफी धमाकेदार रहा है। इसका वर्ल्ड प्रीमियर फेमस 'टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल' (TIFF) में हुआ था। दरअसल, पिछले साल इसे 'इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न' में भी 'स्पॉटलाइट फिल्म' के तौर पर सराहा गया था। साथ ही, मणिपुरी भाषा की इस फिल्म का बाफ्टा जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचना न केवल मणिपुर के लिए, बल्कि पूरे भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा (Regional Cinema) के लिए एक बड़ी जीत है।