फिल्म निर्देशक कमाल अमरोही अपनी पत्नी और एक्ट्रेस मीना कुमारी को बेहद प्यार किया करते थे. वो हमेशा यही चाहते थे कि वो अपनी पत्नी को लेकर एक ऐसी फिल्म बनाए, जिसको सालों-साल देखा जा सके और उनकी पत्नी का नाम अमर हो सके. इसके बाद ही उन्होंने मीना कुमारी को लेकर ‘पाकीज़ा’‍ फिल्म बनाई, जो सुपरहिट साबित हुई.
हमने शाहजहां और मुमताज की प्रेम कहानी को पढ़ा और जाना कि वो अपनी पत्मी मुमताज से बेपनाह मोहब्बत किया करते थे और उन्होंने उनके नाम पर ताज महल तक बना दिया था. ऐसी ही एक और लव स्टोरी थी, जो बॉलीवुड में भी उभरी और आज हर कोई उनके बारे में जानता है. आज हम आपको बॉलीवुड के एक फिल्म निर्देशक और उनकी फिल्म एक्ट्रेस की लव स्टोरी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपनी पत्नी को बेहद चाहते थे और साथ ही चाहते थे कि उनकी पत्नी का नाम अमर हो जाए, जिसके लिए उन्होंने एक यादगार फिल्म बना डाली. आज हम आपको फिल्मकार कमाल अमरोही और एक्ट्रेस मीना कुमारी के बारे में बताने जा रहे हैं.
कमाल अमरोही अपनी पत्नी और एक्ट्रेस मीना कुमारी को बेपनाह चाहते थे. साथ ही मीना को लेकर एक ऐसी फिल्म बनाने की उनकी ख्वाहिश रखते थे, जिसकी चर्चा सालों तक हो. इसलिए साल 1958 में उन्होंने मीना कुमारी कको लेकर ‘पाकीज़ा’ फिल्म बनानी शुरू की. इसी बीच साल 1960 में निर्देशक के आसिफ की फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ रिलीज हुई, जिसने दर्शकों का दिल जीत लिया और सुर्खियों में छा गई. खास बात ये है कि इस फिल्म की कहानी कमाल अमरोही द्वारा भी की गई थी. इसकी के बाद उन्होंने सोचा कि पाकीज़ा को भी इसी तरह की साज सज्जा के साथ बनाना होगा.
कमाल अमरोहा के रहने वाले थे. इसलिए उनके नाम में अमरोही लगाया जाता था. वहां उनकी हवेली थी, जिसके आधार पर पाकीजा का सेट बनवाया गया था. शुरुआत में पाकीजा ब्लैक एंड व्हाइट बन रही थी. साल 1960 के आसपास रंगीन फिल्मों का दौर भी लगभग शुरू हो चुका था. इसलिए पाकीजा को भी रंगीन बनाने का काम शुरू किया गया. कमाल अपनी इस फिल्म में इस कदर खो गए कि उन पर परफेक्शन का भूत सवार हो गया. जरा सी भी कमी होने पर वे फिल्म की शूटिंग नहीं करते थे. सेट पर जरा सी भी खरोंच आने पर वो शूटिंग को रोक दिया करते थे. इतना ही नहीं उस समय सिनेमास्कोप की तकनीक आई तो इसका इस्तेमाल पाकीज़ा में भी किया गया.
गुरुदत्त की 'कागज के फूल' और दिलीप कुमार की 'लीडर' पहली दो भारतीय फिल्म थी जो सिनेमास्कोप तकनीक से बनी थी. ऐसी ही बेहद सारी उठापटक के चलते फिल्म का काम बेहद धीरे चल रहा था, लेकिन इससे भी कमाल को कोई खास फर्क नहीं पड़ा. वे तो अपनी पूरी कोशिशों के साथ फिल्म को कमाल की बनाने में जुटे हुए थे. ऐसे ही 6 साल गुजर गए. साल 1964 तक फिल्म आधी ही बन पाई थी और इसी कमाल के अपनी पत्नी और खूबसूरत अदाकारा मीना कुमारी से संबंध बेहद खराब चले थे. दोनों का एक-दूसरे को बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था. कई तरह की बातें और अफवाहें भी सुर्खियों में आईं. जैसे कि कमाल ने मीना को बेहद परेशान किया.
बता दें कि कमाल और मीना ने तलाक तो नहीं लिया, लेकिन एक दूसरे से अलग हो गए थे. चार साल बीत गए और 'पाकीजा' का कोई काम नहीं हुआ. इस दौरान मीना कुमारी ने शराब को अपना लिया और खूब पीने लगीं. इसी के चलते उनकी सेहत भी खराब होती चली गई. साल 1968 के आसपास कमाल को लगा कि पाकीजा को पूरा किया जाना चाहिए. खूब पैसा लग चुका था. मीना कुमारी तक बात पहुंचाई गई, लेकिन उन्होंने कोई खास रूचि नहीं दिखाई. मीना कुमारी के नजदीकी दोस्तों में सुनील दत्त और उनकी पत्नी नरगिस का नाम शुमार था. वे मीना और कमाल की उन व्यक्तिगत बातों से भी वाकिफ थे जिनकी जानकारी चंद लोगों को ही थी.
उन्होंने उनको समझाया और मीना कुमारी ने फिल्म की शूटिंग शुरू की. वो काफी बीमार थी, लेकिन फिर भी उन्होंने फिल्म की शूटिंग पूरी की और 4 फरवरी 1972 में पाकीजा रिलीज हो गई. बताया जाता है कि शुरूआत में तो फिल्म को कोई खास रिस्पॉन्स नहीं मिला था. इसका सबसे बड़ा कारण था कि ये फिल्म 14 साल में बन कर रिलीज हुई. दो हफ्ते तो फिल्म को ऐसे ही निकल गए. तब मीना कुमारी भी 40 साल की हो चुकी थी और कुछ समय बाद उनका निधन हो गया. इसके बाद उनकी ये फिल्म देश के बाकी जगहों में रिलीज हुई और धीर-धीर हिट साबित हुई. लोगों को फिल्म बेहद पसंद आ रही थी और आज के समय में इस फिल्म का नाम और मीना कुमारी का नाम चर्चाओं में बना रहता है, जो कमाल अमरोही चाहते थे.