Kareena Kapoor On Work Shift Hours: अभिनेत्री करीना कपूर ने हाल ही में काम करने के घंटों को लेकर एक बयान जारी किया है। उन्होंने अपने नंदोई कुणाल खेमू से बिल्कुल अलग नजरिया साझा किया है।
Kareena Kapoor On Work Shift Hours: बॉलीवुड में इन दिनों काम के घंटों और वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है। अभिनेत्री दीपिका पादुकोण द्वारा फिल्मों के लिए आठ घंटे की शिफ्ट की मांग किए जाने के बाद से यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है। इस बहस में कई सितारे अपनी-अपनी राय दे रहे हैं।
हाल ही में करीना कपूर ने भी इस विषय पर खुलकर बात की और दीपिका के पक्ष में अपनी बात रखी। दिलचस्प बात यह है कि करीना के नंदोई और अभिनेता कुणाल खेमू ने इसी मुद्दे पर कुछ अलग नजरिया पेश किया था, जिसके बाद ये बहस और तेज हो गई।
एक इंटरव्यू के दौरान करीना कपूर से पूछा गया कि फिल्म इंडस्ट्री में नई मां बनने के बाद काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना कितना मुश्किल होता है। इस पर उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब कलाकार मां बनती है तो उसकी जिम्मेदारियां पहले से कहीं ज्यादा बढ़ जाती हैं।
करीना ने बताया कि फिल्मों की शूटिंग अक्सर लंबे समय तक चलती है और कई बार विदेशों में भी करनी पड़ती है। ऐसे में हर चीज की सही तरीके से योजना बनाना जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि परिवार और काम दोनों को साथ लेकर चलने के लिए पहले से तैयारी करना जरूरी है।
करीना कपूर ने यह भी कहा कि शादीशुदा जीवन में सबसे जरूरी चीज आपसी समझ होती है। उनके मुताबिक अगर दोनों पति-पत्नी एक साथ व्यस्त हो जाएं तो बच्चों की देखभाल मुश्किल हो सकती है। इसलिए परिवार में किसी एक का बच्चों के साथ रहना जरूरी होता है।
करीना ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि जब वो किसी फिल्म की शूटिंग में व्यस्त रहती हैं, तब उनके पति सैफ अली खान बच्चों की जिम्मेदारी संभालते हैं। इसी तरह कई बार वो खुद भी अपने काम के शेड्यूल को इस तरह प्लान करती हैं कि बच्चों के साथ समय बिताया जा सके।
इस बहस में अभिनेत्री अनन्या पांडे ने भी दीपिका पादुकोण का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि दीपिका हमेशा से मेहनती कलाकार रही हैं और उन्होंने पहले कभी काम के घंटों को लेकर कोई शर्त नहीं रखी थी। लेकिन मां बनने के बाद परिस्थितियां बदल जाती हैं।
अनन्या का मानना है कि शुरुआती वर्षों में बच्चे को माता-पिता के साथ समय की जरूरत होती है। ऐसे में अगर कोई अभिनेत्री अपने काम के घंटे तय करना चाहती है तो इसमें कोई गलत बात नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म इंडस्ट्री को भी इस बदलाव को समझने की जरूरत है।
दूसरी ओर अभिनेता कुणाल खेमू ने काम के घंटों की इस बहस पर थोड़ा अलग दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि हर पेशे के साथ कुछ जिम्मेदारियां और अपेक्षाएं जुड़ी होती हैं, जिन्हें समझना जरूरी है। उनके मुताबिक अगर कोई व्यक्ति किसी क्षेत्र में काम करना चाहता है तो उसे उस पेशे की मांगों को भी स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने तो यहां तक कहा था कि कोई भी अचानक से मां नहीं बनता है।
कुणाल ने यह भी कहा कि अगर कलाकार अपने काम के घंटे खुद तय करना चाहते हैं तो उन्हें निर्माता के तौर पर भी जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए। हालांकि उनके बयान को कई लोगों ने दीपिका पादुकोण से जोड़कर देखा, जिससे सोशल मीडिया पर चर्चा और तेज हो गई।
दीपिका पादुकोण की आठ घंटे की शिफ्ट की मांग के बाद से बॉलीवुड में वर्क-लाइफ बैलेंस पर गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे कलाकारों के अधिकार के रूप में देख रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री के काम करने का तरीका अलग होता है।
फिलहाल ये बहस अभी खत्म होती नजर नहीं आ रही है। लेकिन इतना जरूर है कि इस मुद्दे ने फिल्म इंडस्ट्री में काम के माहौल और कलाकारों की जरूरतों को लेकर नई बातचीत शुरू कर दी है।