First Hindi Horror Movie Mahal: सालों पहले आई एक फिल्म ने 200 करोड़ का आंकड़ा पार किया था। ये उस समय हजारों करोड़ों के बराबर था। आखिर कौन सी फिल्म है वो. चलिए जानते हैं।
First Hindi Horror Movie Mahal: आज जब बॉलीवुड में 100 करोड़ और 200 करोड़ क्लब की चर्चा आम हो गई है, तब शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर में भी एक ऐसी फिल्म बनी थी जिसने अपनी लागत से कई गुना ज्यादा कमाई कर इतिहास रच दिया था। साल 1949 में रिलीज हुई फिल्म ‘महल’ न सिर्फ हिंदी सिनेमा की पहली सफल हॉरर फिल्मों में गिनी जाती है, बल्कि ये उस दौर की सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली फिल्मों में भी शामिल रही।
कमाल अमरोही के निर्देशन में बनी इस फिल्म का बजट मात्र 9 लाख रुपये था, लेकिन इसने बॉक्स ऑफिस पर लगभग 1.25 करोड़ रुपये की कमाई की। अगर उस समय की कमाई को आज के हिसाब से आंका जाए तो ये आंकड़ा 200 करोड़ रुपये से भी अधिक बैठता है। यही वजह है कि ‘महल’ को हिंदी सिनेमा की पहली बड़ी हॉरर ब्लॉकबस्टर माना जाता है।
इस फिल्म की खास बात यह भी थी कि जब यह रिलीज हुई, तब अभिनेत्री मधुबाला की उम्र महज 15 साल थी। इतनी कम उम्र में उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों को ऐसा प्रभावित किया कि वो रातों-रात स्टार बन गईं। उनके साथ फिल्म में अशोक कुमार मुख्य भूमिका में नजर आए थे। फिल्म की रहस्यमयी कहानी, सस्पेंस से भरा माहौल और डरावना संगीत उस दौर के दर्शकों के लिए बिल्कुल नया अनुभव था।
‘महल’ की सफलता सिर्फ कलाकारों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इस फिल्म ने गायिका लता मंगेशकर के करियर को भी नई दिशा दी। फिल्म का गीत ‘आएगा आने वाला’ आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार और सिहरन पैदा करने वाले गीतों में गिना जाता है। इस गाने ने लता मंगेशकर को देशभर में पहचान दिलाई और वह संगीत की दुनिया की नई आवाज बनकर उभरीं।
फिल्म की कहानी पुनर्जन्म और रहस्यमयी घटनाओं के इर्द-गिर्द घूमती है। एक पुरानी हवेली, अधूरी प्रेम कहानी और आत्मा के इंतजार जैसे तत्वों ने दर्शकों के दिलों में डर और रोमांच दोनों पैदा किया। यही कारण था कि आने वाले दशकों में बनने वाली कई फिल्मों ने इसी तरह की कहानी और माहौल को अपनाया। कहा जाता है कि हिंदी फिल्मों में पुनर्जन्म की थीम को लोकप्रिय बनाने का श्रेय भी ‘महल’ को ही जाता है।
दिलचस्प बात यह भी है कि इस फिल्म का निर्माण उस समय हुआ जब बॉम्बे टॉकीज आर्थिक संकट से गुजर रहा था। ऐसे हालात में निर्देशक कमाल अमरोही ने खर्च कम करने के लिए अपने निजी संग्रह से कई प्रॉप्स इस्तेमाल किए। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने जो सिनेमाई जादू रचा, वह आज भी फिल्म इतिहास में मिसाल माना जाता है।