
Mahie Gill On Typecasting In Bollywood: बॉलीवुड अभिनेत्री माही गिल अमेजन प्राइम की वेब सीपीज रक्तांचल के सीजन 3 को लेकर इन दिनों चर्चाओं में हैं। उन्होंने अपने लंबे फिल्मी सफर को याद करते हुए बताया कि एक समय ऐसा था जब इंडस्ट्री में उन्हें सिर्फ एक तय छवि के साथ देखा जाता था।
हर नई फिल्म में लगभग एक जैसे किरदार मिलने लगे थे, जिससे वो खुद भी ऊब चुकी थीं। अभिनेत्री का कहना है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ने न सिर्फ उनके अभिनय को नई दिशा दी, बल्कि उन्हें अपनी स्थापित छवि से बाहर निकलकर अलग तरह के किरदार निभाने का अवसर भी दिया।
हाल ही में अपनी वेब सीरीज 'रक्तांचल 3' के प्रमोशन के दौरान 'इंडिया टुडे' के साथ बातचीत करते हुए माही गिल ने खुलकर बताया कि कई सालों तक उन्हें ग्लैमरस महिला के रोल ही ऑफर किए जाते रहे। फिल्म निर्माताओं की सोच भी उनके लिए लगभग तय हो चुकी थी। उन्हें अक्सर ऐसी महिला के रूप में पेश किया जाता था जो साड़ी पहनती हो, सिगरेट पीती हो और बेहद स्टाइलिश अंदाज में नजर आती हो। लगातार एक जैसी भूमिकाएं निभाने के बाद उन्होंने महसूस किया कि अब कुछ नया करने का समय आ गया है।
अभिनेत्री ने कहा कि वो उन किरदारों से नाराज नहीं थीं और भविष्य में भी ऐसे रोल करना चाहेंगी, लेकिन लगातार एक ही तरह की भूमिकाएं निभाने से कलाकार के तौर पर उनकी पहचान सीमित होती जा रही थी। इसी वजह से जब 'रक्तांचल 3' में सरस्वती देवी का किरदार उनके पास आया तो उन्होंने इसे अपने करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं में से एक माना।
माही गिल के मुताबिक इस किरदार के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसकी भाषा और स्थानीय बोली थी। उन्होंने बताया कि शरीर की अभिव्यक्ति पर काम करना आसान था, लेकिन संवादों में इस्तेमाल होने वाली बोली को सही ढंग से बोलने के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ी। यही वजह है कि यह किरदार उनके लिए सीखने और खुद को साबित करने का नया मौका बन गया।
माही गिल ने ये भी स्वीकार किया कि उन्होंने अपने करियर के बीच लगभग चार साल का लंबा ब्रेक लिया था। इस दौरान कई अच्छे प्रोजेक्ट्स उनके हाथ से निकल गए। हालांकि उन्हें इसका अफसोस नहीं है, लेकिन उनका मानना है कि अगर वह उस समय लगातार काम कर रही होतीं तो कई सफल वेब सीरीज और फिल्मों का हिस्सा बन सकती थीं।
उन्होंने यह भी बताया कि जब उन्हें पहला ओटीटी प्रोजेक्ट ऑफर हुआ था, तब इंडस्ट्री में कई लोगों को विश्वास नहीं था कि वो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करेंगी। लेकिन उन्होंने इसे एक नए अनुभव के तौर पर अपनाया। उनके मुताबिक फिल्म और ओटीटी में काम करने की प्रक्रिया लगभग समान है। फर्क सिर्फ इतना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कलाकारों को ज्यादा प्रयोग करने और अलग-अलग तरह के किरदार निभाने का अवसर मिलता है।