अभियान को सफल करने के लिए मानसिकता में बदलाव की जरूरत है
भारत में मीटू मूवमेंट का आगाज हो चुका है और यौन उत्पीडन को झेल चुकीं कई महिलाओं ने इस बारे में खुलकर बोला है। इस अभियान ने सभी के लिए कार्यस्थल पर एक सुरक्षित माहौल प्रदान करने जैसे मुद्दे पर बहस को शुरू कर दिया है, लेकिन अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा का मानना है कि फिलहाल इस बारे में वास्तव में बदलाव आने के बजाय इसे लेकर शोरशराबा ज्यादा है।
बदलाव की अपेक्षा शोरशराबा ज्यादा:
मलाइका ने एक इंटरव्यू में भारत में मीटू मूवमेंट पर हो रही चर्चा व इससे आए बदलाव के बारे में कहा,'मुझे ज्यादा बदलाव नजर नहीं आ रहा है। मैं लोगों की बातों को सुन रही हूं। मुझे लगता है कि बदलाव की अपेक्षा इसे लेकर शोरशराबा कहीं ज्यादा है।'
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मानसिकता में बदलाव की जरूरत:
हालांकि, मलाइका का कहना है कि इस अभियान को फिलहाल अभी बहुत दूर जाना है।
एक बेटे की मां मलाइका ने कहा, 'अगर हम मनोरंजन उद्योग की बात कर रहे हैं तो बहुत कुछ होता दिखाई दे रहा है। लोग इस बारे में बात कर रहे हैं। लेकिन, वास्तविक बदलाव के लिए या लोगों द्वारा आगे आकर इस बारे में कुछ करने और अभियान को सफल करने के लिए मानसिकता में बदलाव की जरूरत है और यह बदलाव रातोरात नहीं आ सकता।'
यहां से शुरू हुआ बॉलीवुड में मीटू मूवमेंट:
हॉलीवुड में मीटू मूवमेंट का जबरदस्त असर दिखने के बाद तनुश्री दत्ता द्वारा अभिनेता नाना पाटेकर पर फिल्म 'हॉर्न ओके' की शूटिंग के दौरान छेडख़ानी करने का आरोप लगाने के बाद बॉलीवुड में भी इस मूवमेंट ने जोर पकड़ा और कई महिलओं ने अपनी दास्तां बयां की। कई बड़े नामों जैसे विकास बहल, चेतन भगत, गुरसिमरन खंबा, कैलाश खेर, रजत कपूर, आलोक नाथ, अनु मलिक और साजिद खान पर यौन उत्पीडऩ के आरोप लगे।