
Rishi Kapoor mention aboutBasheshwarnath Kapoor Love Story: बॉलीवुड में कपूर खानदान की एक अलग पहचान है। चुलबुले, जिंदादिल, खुशमिजाज, रोमांटिक और गुस्सा जैसे नाक पर मक्खी– इस खानदान के कई चिराग इन खूबियों के साथ जिए। राज कपूर, रणधीर कपूर, ऋषि कपूर और अब रणबीर कपूर- ऑन स्क्रीन और ऑफ-स्क्रीन हमेशा चर्चा में रहे। लेकिन कपूर परिवार का एक मेम्बर ऐसा भी रहा, जिसके किस्से-कहानियां कम ही सामने आए। महज 36 साल की उम्र में इन्हें नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया। ना... ना... करप्शन या गुस्से की वजह से नहीं, बल्कि कहानी थोड़ी फिल्मी है। जनाब प्यार में थे, प्यार सिर पर चढ़ नशा बन गया और मोहब्बत के नशे में प्रेमिका के घर तक पहुंचने के लिए सुरंग खोदने का प्लान बना डाला। प्लान पर काम शुरू भी हुआ, मगर पकड़े गए। बात वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची और सरकारी नौकरी से हाथ गंवाना पड़ा।
एक जमाने में दिलों की धड़कन रहे हरफनमौला कलाकार ऋषि कपूर ने अपनी ऑटोबायोग्राफी Khullam Khulla: Rishi Kapoor Uncensored में कपूर खानदान के उस मेम्बर के बारे में बताया है। ये थे ऋषि कपूर के पिता राज कपूर के दादा और नाम था- बशेश्वर नाथ। पेशे से तहसीलदार थे और उन्हें प्यार से 'दीवान साहब' कहा जाता था। दीवान साहब रौबीले दिखाई देते थे, लेकिन जब दिल में प्यार की कली फूटी, तो किसी फिल्म के रोमांटिक हीरो बन गए। प्रेमिका को देखने की बेताबी में सुरंग खोद डाली, पकड़े गए और अच्छी-खासी नौकरी हाथ से निकल गई। बशेश्वर नाथ, ऋषि कपूर के लिए रियल लाइफ के सबसे इंप्रेसिव कैरेक्टर थे।
किताब में उन्होंने लिखा है- एक्टिंग मेरे खून में थी और इससे बच पाना नामुमकिन था। जब मैं यह कहता हूं, तो मैं केवल कपूर परिवार के बारे में नहीं, बल्कि मल्होत्रा परिवार यानी अपनी मां के परिवार के बारे में भी सोच रहा होता हूं, जो मेरे पिता और उनके रिश्तेदारों की तरह ही जोशीले और बेबाक स्वभाव के थे। कपूर परिवार के पुरुषों के बारे में बहुत सी कहानियां मशहूर हैं, और मेरी पसंदीदा कहानी मेरे पिता (राज कपूर) के दादा बशेश्वर नाथ के बारे में है। उन्हें केवल 36 साल की उम्र में नौकरी से सस्पेंड कर दिया गया था। वे अपनी प्रेमिका के घर तक सुरंग खोदते हुए पकड़े गए थे। किताब में बशेश्वर नाथ के एक और किस्से का भी जिक्र है। बशेश्वर नाथ के पास एक घोड़ी हुआ करती थी, जो एक ब्रिटिश अफसर को काफी पसंद थी। एक दिन उस अफसर ने बशेश्वर नाथ से कहा– आपकी घोड़ी अच्छी है। इस पर उनका जवाब था- 'तेरी गोरी अच्छी है'। यह बात उन्होंने अफसर के साथ आई गोरी महिला के लिए कही थी। राज कपूर की अपने दादा यानी बशेश्वर नाथ के साथ बहुत जमती थी। क्योंकी दोनों के समाज के स्थापित बंधनों को तोड़ने में मजा आता था।
कपूर खानदान अपनी अदाकारी के साथ-साथ नीली आंखों के लिए भी मशहूर है, जो ऋषि कपूर और उनके भाइयों को अपनी दादी से विरासत में मिलीं। ऋषि ने लिखा है– ‘हमें अपनी मशहूर नीली आंखें और शाही अंदाज़ अपनी दादी- रामसरनी कपूर से मिला। जवानी के दिनों में, मेरी दादी बहुत खूबसूरत महिला थीं और हर कोई उन्हें मुड़-मुड़कर देखता था। दादाजी एक ज्यादा भले इंसान थे। उन्होंने ही परिवार का सरनेम 'नाथ' से बदलकर 'राज' किया, जिससे पृथ्वी नाथ कपूर का नाम बदलकर पृथ्वीराज कपूर हो गया’। राज कपूर का नाम सृष्टि नाथ कपूर रखा गया था, लेकिन बाद में इसे रणबीर राज कपूर किया गया। हालांकि, दुनिया उन्हें राज कपूर के नाम से ज्यादा पहचानती है। कपूर परिवार की दबंग और जोशीली छवि का आर्किटेक्ट राज कपूर को ही माना जाता है।
ऋषि कपूर का बचपन मुंबई के माटुंगा स्थित एक बड़े घर में अपने दादा-दादी के साथ जॉइंट फैमिली में बीता। इस घर में एस.पी.कृपाराम नाम के सज्जन भी रहा करते थे। ऋषि कपूर और दूसरे बच्चों को लगता की वो कोई दूर के रिश्तेदार हैं। लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि वे रिश्तेदार नहीं थे। दरअसल, पृथ्वीराज कपूर बड़े दिल वाले और सच्चे गांधीवादी थे।
एक दिन उन्होंने अपने दोस्त कृपाराम को माटुंगा वाले घर डिनर के लिए बुलाया और वे अगले पच्चीस सालों तक वहीं रहे। हैरानी की बात तो यह है कि पृथ्वीराज कपूर के जुहू वाले नए घर में शिफ्ट हो जाने के बाद भी वे वहीं मेहमान बनकर रहे। अपनी ज़िंदगी के आखिरी दिनों में पृथ्वीराज कपूर जुहू वाले घर में रहते थे और उसे 'झोपड़ी' कहते थे। आज जुहू एक पॉश इलाका है और फिल्मी सितारों से भरा रहता है, लेकिन उन दिनों इसे बहुत दूर-दराज़ और सुनसान इलाका माना जाता था। अमीर और मशहूर लोग वहां बसने के बारे में सोच भी नहीं सकते थे, लेकिन ऋषि कपूर के दादा ने अपनी ज़िंदगी के आखिरी दिन उसी ज़मीन पर बने घर में बिताए, जहां बाद में पृथ्वी थिएटर बनाया गया।
ऋषि कपूर की 10 सुपरहिट फिल्में...
| क्रमांक | सुपरहिट फिल्म का नाम | रिलीज का साल | हीरोइन |
|---|---|---|---|
| 1 | बॉबी | 1973 | डिंपल कपाड़िया |
| 2 | लैला मजनू | 1976 | रंजीता कौर |
| 3 | रफू चक्कर | 1975 | नीतू सिंह |
| 4 | कर्ज | 1980 | टीना मुनीम |
| 5 | प्रेम रोग | 1982 | पद्मिनी कोल्हापुरी |
| 6 | नगीना | 1986 | श्रीदेवी |
| 7 | चांदनी | 1989 | श्रीदेवी |
| 8 | हिना | 1991 | जेबा बख्तियार |
| 9 | दीवाना | 1992 | दिव्या भारती |
| 10 | दामिनी | 1993 | मीनाक्षी शेषाद्रि |