
Salman Khan Kala Hiran Film Controversy: सलमान खान से जुड़ा ‘काला हिरण’ मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। जी हां, फिल्ममेकर अमित जानी ने दावा किया है कि टीजर रिलीज होने के बाद उन्हें धमकियां मिलीं। कथित तौर पर फोन करने वालों ने खुद को सलमान खान का करीबी बताते हुए फिल्म रिलीज करने पर जान से मारने और बम से उड़ाने की धमकी दी। इस दावे ने विवाद को और गंभीर बना दिया है। जानी अब दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं।
दरअसल, फिल्म ‘काला हिरण: द बैटल फॉर लिगेसी’ का टीजर 17 जुलाई को रिलीज हुआ था। इसके बाद सलमान खान ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म के टीजर और प्रमोशनल कंटेंट में उनकी पर्सनैलिटी का बिना अनुमति इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में हाई कोर्ट ने 27 जुलाई को टीजर और उससे जुड़े प्रमोशनल मटीरियल को हटाने का आदेश दिया। हालांकि, फिल्म पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का आदेश नहीं दिया गया था। लेकिन अमित जानी इस फैसले से सहमत नहीं हैं। उन्होंने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन यानी SLP दाखिल की है। उनका कहना है कि फिल्म को बैन नहीं किया गया है। सिर्फ टीजर और कुछ प्रमोशनल कंटेंट हटाने का आदेश दिया गया है।
अमित जानी ने आरोप लगाया कि टीजर आने के बाद उन्हें कथित तौर पर अंडरवर्ल्ड और टेरर ग्रुप्स से धमकी भरे फोन आए। जानी का दावा है कि उन्हें फिल्म बनाने और सलमान खान से जुड़े विषय पर कंटेंट जारी करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। उन्होंने बम से उड़ाने और जान से मारने की धमकी मिलने की बात भी कही।
जानी ने आगे कहा कि उन्होंने कथित धमकियों की जानकारी पुलिस और NIA समेत संबंधित अधिकारियों को दी है। उनका कहना है कि अगर उन्हें धमकी मिल रही है, तो उसके बारे में सार्वजनिक रूप से बोलने का अधिकार भी उन्हें होना चाहिए।
अमित जानी का कहना है कि फिल्म में सलमान खान या लॉरेंस बिश्नोई सीधे तौर पर मौजूद नहीं हैं। उनके मुताबिक फिल्म 1998 के काले हिरण शिकार मामले से जुड़ी सार्वजनिक घटनाओं से प्रेरित है।
सलमान खान की याचिका में दावा किया गया था कि टीजर में ‘अयान खान’ नाम के काल्पनिक किरदार के जरिए उन्हें दिखाया गया है। साथ ही उनकी फिल्मों और काले हिरण मामले से जुड़े संदर्भों का इस्तेमाल किया गया है।
जानी का तर्क है कि फिल्म बनने के बाद उसे CBFC से सर्टिफिकेशन मिलना चाहिए। उनका सवाल है कि अदालत की ओर से टीजर हटाने का आदेश किस आधार पर दिया गया। अब इस विवाद की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी। वहां यह तय होना बाकी है कि टीज़र और प्रमोशनल कंटेंट को लेकर हाई कोर्ट का आदेश बरकरार रहेगा या फिल्ममेकर्स को राहत मिलेगी।