
शबाना आजमी और सनी देओल की फोटोज। (फोटो सोर्स: instagram- azmishabana18 and iamsunnydeol)
Sunny Deol Reaction on Shabana Azmi Gadar Statement: राजकुमार संतोषी की बंटवारे पर बनी फिल्म 'बटवारा 1947' ने सनी देओल और दिग्गज एक्ट्रेस शबाना आजमी को बड़े पर्दे पर एक साथ खड़ा किया है। जहां उनकी इमोशनल केमिस्ट्री इस ऐतिहासिक कहानी का एक अहम हिस्सा है, वहीं उनके इस नए साथ ने एक पुराने किस्से की यादें भी ताजा कर दी हैं, जब सनी ने शबाना आजमी द्वारा उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'गदर: एक प्रेम कथा' की आलोचना पर कड़ा रिएक्शन दिया था।
साल 2001 में, 'गदर: एक प्रेम कथा' ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त धूम मचाई थी और अपने समय की सबसे बड़ी सफल फिल्मों में से एक थी। हालांकि, अनिल शर्मा के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने बंटवारे, राष्ट्रवाद और भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को दिखाने के तरीके को लेकर काफी राजनीतिक और सामाजिक बहस भी छेड़ी थी। वहीं, शबाना आजमी उन प्रमुख लोगों में से थीं जिन्होंने फिल्म में इन विषयों को दिखाए जाने के तरीके पर सवाल उठाए थे। बीबीसी के अनुसार, शबाना आजमी ने फिल्म की कहानी की आलोचना की थी और इसे भड़काऊ बताया था।
बीबीसी के मुताबिक, शबाना आजमी ने कहा था, "गदर राष्ट्रवाद, धर्म और पहचान के मुद्दों को उलझाती है, जबकि बंटवारे से पैदा हुए दर्द की मुश्किलों को ठीक से नहीं दिखाती।" उन्होंने फिल्म को 'भड़काऊ' भी बताया, जो 'मुसलमानों को 'दूसरा' या अलग तरीके से दिखाती है।'
सनी देओल, ने इस आलोचना को हल्के में नहीं लिया। एक पुराने इंटरव्यू में, एक्टर ने शबाना की बातों का सीधे जवाब दिया और फिल्म के मकसद का बचाव करते हुए कहा, "शबाना आजमी की बातों से मुझे सच में निराशा हुई। उनसे उम्मीद की जाती है कि वो पढ़ी-लिखी और समझदार होंगी, लेकिन फिर भी उन्होंने फिल्म के बारे में भड़काऊ बातें कहीं। जिन लोगों ने फिल्म को लेकर हंगामा किया, वो बस सुर्खियों में आना चाहते थे। 'गदर' की कामयाबी साबित करती है कि उसमें कुछ भी गलत नहीं था, लोगों ने इसे इतना पसंद किया कि इसके बारे में बुरा-भला कहने वाले सभी लोगों की बोलती बंद हो गई।'
सनी ने आगे बताया कि उन्हें आलोचना से बुरा क्यों लगा, और कहा कि फिल्म का मकसद कभी भी किसी समुदाय को ठेस पहुंचाना या धार्मिक तनाव पैदा करना नहीं था। उन्होंने कहा, “मुझे बुरा लगा था। कहानी बंटवारे के समय की थी, लेकिन किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने या कोई गड़बड़ करने का कोई इरादा नहीं था। फिल्म के मुख्य किरदार बहुत साफ-सुथरे और मासूम हैं। जो लोग सोचते थे कि फिल्म देश-विरोधी हैं, जो लोग कहते थे कि हम धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना चाहते हैं, उनकी सोच ही गलत है।"
दो दशक से भी ज्यादा समय के बाद, बंटवारे की पृष्ठभूमि पर बनी एक कहानी में उनके रास्ते एक हुए हैं। 'बंटवारा 1947' में सनी ने लाहौर में रहने वाले एक मुस्लिम प्रवासी 'सिकंदर मिर्जा' का किरदार निभाया है, जो अपनी ताकत और हिम्मत का इस्तेमाल करके शबाना आजमी द्वारा निभाए गए एक बुज़ुर्ग हिंदू महिला 'माई' के किरदार की रक्षा और मदद करता है।
फिल्म की कास्टिंग की दिलचस्प बात ये है कि इसमें ऐसे दो एक्टर्स साथ आए हैं जो कभी बंटवारे पर आधारित कहानी को लेकर हुई बहस में एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े थे। 2026 में, 'बटवारा 1947' ने सनी और शबाना को उसी उथल-पुथल भरे ऐतिहासिक दौर में एक भावनात्मक रिश्ते को समझने का मौका दिया है।
Updated on:
20 Aug 2026 02:51 pm
Published on:
20 Aug 2026 01:47 pm
