
Sandeep Reddy Vanga: फिल्मों में हिंसा और उसके समाज पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। आंध्र प्रदेश के एक स्कूल में 10वीं कक्षा की छात्रा पर चेनसॉ से हुए हमले के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने बॉलीवुड फिल्मों में दिखाई जाने वाली हिंसा पर सवाल उठाए हैं। इस दौरान रणबीर कपूर की फिल्म 'एनिमल' का नाम भी चर्चा में आ गया। अब फिल्म के निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने उन लोगों पर निशाना साधा है, जो इस घटना को फिल्मों से जोड़कर फिल्म निर्माताओं की आलोचना कर रहे हैं। इन्हीं में ध्रुव राठी का नाम भी शामिल था।
संदीप रेड्डी वांगा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि किसी गंभीर अपराध के बाद सबसे पहले पीड़ितों के प्रति सहानुभूति दिखानी चाहिए और घटना के पीछे की बड़ी समस्या को समझने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सिनेमा को आसान निशाना बनाना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।
दरअसल, आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के रापटाडु में एक स्कूल के अंदर 10वीं कक्षा की छात्रा पर चेनसॉ से हमला किए जाने की घटना सामने आई है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर फिल्मों में दिखाई जाने वाली हिंसा को लेकर चर्चा शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म 'एनिमल' और हालिया फिल्म 'धुरंधर' का जिक्र करते हुए सवाल उठाए।
इस विवाद के बीच 'एनिमल' का एक सीन भी चर्चा में आया, जिसमें रणबीर कपूर का किरदार हाथ में भरी हुई बंदूक लेकर स्कूल की क्लास में पहुंचता है। इसी दृश्य को लेकर कुछ लोगों ने फिल्म में दिखाई गई हिंसा और वास्तविक जीवन में होने वाली आपराधिक घटनाओं के बीच संबंध तलाशने की कोशिश की।
हालांकि, किसी फिल्म के दृश्य और वास्तविक अपराध के बीच सीधे संबंध का दावा करने के लिए ठोस सबूत जरूरी होते हैं। इसी बहस पर अब वांगा ने अपनी नाराजगी जाहिर की है।
संदीप रेड्डी वांगा ने बुधवार, 4 नवंबर को एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि जब कोई व्यक्ति जघन्य अपराध करता है तो सबसे पहली प्रतिक्रिया पीड़ितों के प्रति सहानुभूति और समस्या को समझने की होनी चाहिए। इसके बजाय सिनेमा को सुविधाजनक निशाना बनाना सही नहीं है।
उन्होंने आगे कुछ कलाकारों, निर्देशकों और निर्माताओं पर भी निशाना साधा। वांगा ने आरोप लगाया कि कुछ लोग अपनी असफलता और निराशा के चलते दूसरों के काम पर टिप्पणी करने का मौका तलाशते रहते हैं। उन्होंने ऐसे लोगों को घेरते हुए कहा कि कुछ अभिनेता और फिल्म निर्माता मौका मिलने पर खुद को समाज सुधारक घोषित कर देते हैं। अपने पोस्ट के आखिर में उन्होंने लिखा, 'एक त्रासदी सहानुभूति की हकदार होती है, अवसरवाद की नहीं। दोनों के बीच अंतर समझिए।'
वांगा की इस प्रतिक्रिया के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर फिल्मों में हिंसा, फिल्म निर्माताओं की जिम्मेदारी और वास्तविक अपराधों के बीच संबंध को लेकर बहस तेज हो गई है।
यह पूरा मामला आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के रापटाडु स्थित एक स्कूल का है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 21 वर्षीय हेमंत नाम का युवक कथित तौर पर स्कूल में घुसा और वहां मौजूद 15 साल की 10वीं कक्षा की छात्रा पर चेनसॉ से हमला कर दिया। घटना के समय स्कूल में दूसरे छात्र भी मौजूद थे।
इस दौरान लक्ष्मी नाम की एक अन्य छात्रा ने पीड़िता को बचाने की कोशिश की। हमले के बीच हस्तक्षेप करने के कारण उसे भी चोटें आईं। घटना के बाद दोनों छात्राओं को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।
प्रारंभिक पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी मुख्य पीड़िता का रिश्तेदार बताया जा रहा है। उस पर आरोप है कि वह काफी समय से छात्रा का पीछा कर रहा था। बताया गया है कि छात्रा की ओर से उसके प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद उसने कथित तौर पर इस हमले को अंजाम दिया। हालांकि, मामले की जांच जारी है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
हमले में घायल हुई मुख्य छात्रा को बेहतर उपचार के लिए बेंगलुरु के मणिपाल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसकी हालत स्थिर बताई गई है। वहीं, दूसरी छात्रा लक्ष्मी को भी इस घटना में चोटें आई हैं।
इस घटना ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है।
'एनिमल' की रिलीज के समय भी फिल्म में दिखाए गए हिंसक दृश्यों को लेकर काफी विवाद हुआ था। कुछ दर्शकों और फिल्म समीक्षकों ने इसके कंटेंट पर सवाल उठाए थे, जबकि संदीप रेड्डी वांगा ने अपने निर्देशन और फिल्म की कहानी का बचाव किया था।
आंध्र प्रदेश की घटना के बाद एक बार फिर यह बहस सामने आ गई है कि फिल्मों में दिखाई जाने वाली हिंसा का दर्शकों पर कितना प्रभाव पड़ता है। हालांकि, वास्तविक अपराधों के पीछे व्यक्तिगत सोच, सामाजिक परिस्थितियां और कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए किसी घटना के लिए सीधे किसी फिल्म को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।