
Sanjay Dutt Recalls Lesson Learnt In Jail: बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त की जिंदगी जितनी शानदार रही है, उतनी ही उतार-चढ़ाव भरी भी। फिल्मी पर्दे पर एक्शन और दमदार किरदार निभाने वाले संजय दत्त ने अपनी निजी जिंदगी में भी कई मुश्किल दौर देखे। साल 1993 मुंबई बम धमाकों के मामले में गिरफ्तारी से लेकर जेल की सजा तक, ये दौर उनके जीवन का सबसे कठिन अध्याय माना जाता है।
लेकिन अब संजय दत्त ने खुलासा किया है कि जेल में बिताए पांच सालों ने उन्हें जिंदगी का सबसे बड़ा सबक सिखाया और ये सीख उन्हें किसी बड़े गुरु ने नहीं, बल्कि एक साधारण हवलदार ने दी थी।
डॉक्टर नागेश्वर रेड्डी के साथ हाल ही में एक बातचीत के दौरान संजय दत्त ने बताया कि जेल में बिताया गया समय सिर्फ सजा नहीं था, बल्कि आत्ममंथन और खुद को बदलने का मौका भी था। उन्होंने कहा कि उस दौरान उन्होंने लोगों को माफ करना सीखा, जो आज उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी सीख बन चुकी है।
संजय दत्त ने बताया कि जेल में एक हवलदार ने उनसे कहा था कि अगर जिंदगी में आगे बढ़ना है तो लोगों को माफ करना सीखो। उन्होंने कहा कि उस पुलिसकर्मी की यह बात उनके दिल में हमेशा के लिए बस गई। अभिनेता के मुताबिक, अगर कोई आपको तकलीफ भी देता है, तब भी उसे माफ कर देना चाहिए क्योंकि यही इंसान को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है।
उन्होंने माना कि सुनने में यह बात बेहद आसान लगती है, लेकिन इसे अपनी जिंदगी में उतारना काफी मुश्किल होता है। इसके बावजूद उन्होंने इस सीख को अपनाने की कोशिश की और आज भी उसी रास्ते पर चल रहे हैं।
यह खुलासा उस समय हुआ जब बातचीत के दौरान संजय दत्त की मशहूर 'जादू की झप्पी' और जिंदगी में 'सॉरी' व 'थैंक यू' जैसे छोटे शब्दों की अहमियत पर चर्चा हो रही थी। इसी दौरान संजय ने कहा कि इंसान तभी बेहतर बन सकता है जब वह अपने भीतर से अहंकार और नफरत को खत्म करे।
उन्होंने कहा कि माफी देना केवल सामने वाले के लिए नहीं, बल्कि खुद की शांति और विकास के लिए भी जरूरी होता है। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि यह आदत विकसित करना आसान नहीं है।
संजय दत्त इससे पहले भी कई बार जेल में बिताए अपने दिनों को याद कर चुके हैं। एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि जेल ने उनका अहंकार पूरी तरह तोड़ दिया। उनके मुताबिक, वह दौर किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं था, लेकिन उसी अनुभव ने उन्हें पहले से बेहतर इंसान बनने में मदद की। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय इंसान को बहुत कुछ सिखा देता है, बशर्ते वह उससे सीखने की इच्छा रखे।
संजय दत्त ने अपनी रिहाई का जिक्र करते हुए भावुक भी हो गए। उन्होंने बताया कि जब वह अंतिम बार जेल से बाहर आए तो वह उनकी जिंदगी का सबसे खुशी भरा दिन था। हालांकि उस पल उन्हें अपने पिता और अभिनेता सुनील दत्त की बहुत याद आई।संजय ने कहा कि अगर उनके पिता उस समय जीवित होते तो शायद सबसे ज्यादा खुश वही होते। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार इंसान की सबसे बड़ी ताकत होता है और इसकी अहमियत कभी कम नहीं आंकनी चाहिए।
संजय दत्त का मानना है कि जिंदगी में चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न आएं, उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना ही असली जीत है। उनके अनुसार, माफी, विनम्रता और परिवार का साथ ही इंसान को हर कठिन दौर से बाहर निकाल सकता है।